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Class 11 • Physics • Bhautiki Bhag-1

Chapter 4: गति के नियम

न्यूटन के नियम, संवेग संरक्षण, घर्षण, वृत्तीय गति और लिफ्ट/घिरनी के प्रश्न — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print: browser से PDF save कर सकते हैं। यह कोई textbook PDF नहीं है।

गति के नियम — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics)  |  Chapter 4  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

न्यूटन के तीन नियम

पहला नियम कहता है कि बाहरी बल न लगे तो वस्तु अपनी अवस्था बनाए रखती है — इसे जड़त्व कहते हैं। दूसरा नियम बताता है कि बल = द्रव्यमान × त्वरण होता है।

तीसरा नियम कहता है कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। क्रिया और प्रतिक्रिया दो अलग वस्तुओं पर लगती हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करतीं।

संवेग और उसका संरक्षण

संवेग p = mv होता है और यह एक सदिश राशि है। जब किसी निकाय पर कोई बाहरी बल न लगे, तो उसका कुल संवेग स्थिर रहता है।

टक्करों की समस्याओं में संवेग संरक्षण सबसे उपयोगी नियम है। रॉकेट का आगे बढ़ना भी संवेग संरक्षण का उदाहरण है — गैस पीछे जाती है, रॉकेट आगे बढ़ता है।

घर्षण और तनाव

घर्षण दो सतहों के बीच की गति का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण गति शुरू होने से रोकता है और गतिक घर्षण चलती गति का विरोध करता है।

डोरी में तनाव दोनों सिरों पर बराबर होता है (यदि डोरी हल्की हो)। आनत तल पर वस्तु का भार दो घटकों में टूटता है — एक तल के लंबवत और एक तल के समांतर।

इस अध्याय का विचार: बल ही गति की अवस्था बदलता है — पहला नियम बताता है कि बिना बल के वस्तु अपनी अवस्था बनाए रखती है, दूसरा नियम बताता है कि बल कितना परिवर्तन लाता है (F = ma), और तीसरा नियम बताता है कि बल हमेशा जोड़े में आते हैं।

पुस्तक की संरचना: अध्याय अरस्तू की भ्रांति से शुरू होकर जड़त्व, तीनों नियम, संवेग संरक्षण, साम्यावस्था, सामान्य बल (तनाव, अभिलंब प्रतिक्रिया, घर्षण) और वृत्तीय गति तक जाता है। इस अध्याय के आंकिक प्रश्नों में पुस्तक स्वयं g = 10 m/s² लेने को कहती है — नीचे के सभी उत्तर उसी मान से हैं।

5.1–5.2 भूमिका और अरस्तू की भ्रांति

अरस्तू मानते थे कि गति बनाए रखने के लिए निरंतर बल चाहिए। यह भ्रांति है: घर्षण जैसे बलों की उपेक्षा करने पर ऐसा लगता है। वास्तव में, बाह्य बल न हो तो एकसमान गति स्वयं बनी रहती है — दैनिक जीवन में गति रुकती है क्योंकि घर्षण और वायु प्रतिरोध बल लगाते रहते हैं।

5.3–5.4 जड़त्व का नियम और न्यूटन का प्रथम नियम

जड़त्व: वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है। प्रथम नियम: यदि किसी वस्तु पर नेट बाह्य बल शून्य हो, तो उसका त्वरण शून्य होता है — वह विराम में रहती है या एकसमान वेग से चलती रहती है। इसी से जड़त्वीय निर्देश तंत्र की परिभाषा मिलती है।

5.5 न्यूटन का द्वितीय नियम

F = ma — बल और त्वरण एक ही दिशा में होते हैं। संवेग रूप: F = dp/dt। बल का SI मात्रक न्यूटन है: 1 N = 1 kg·m/s²। महत्त्वपूर्ण: F का अर्थ वस्तु पर लगा नेट बाह्य बल है; ‘ma’ कोई अलग बल नहीं है — a, F का प्रभाव है।

5.6 न्यूटन का तृतीय नियम

प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है — पर क्रिया और प्रतिक्रिया भिन्न पिंडों पर लगती हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करतीं। घोड़ा गाड़ी को खींच पाता है क्योंकि ज़मीन घोड़े के पैरों पर आगे की ओर घर्षण बल लगाती है; रिक्त स्थान में घोड़ा गाड़ी खींचकर दौड़ नहीं सकता।

5.7 संवेग संरक्षण

बाह्य बल न हो तो किसी निकाय का कुल संवेग नियत रहता है: m₁v₁ + m₂v₂ = नियत। इसी से रॉकेट का प्रणोद, बंदूक का प्रतिक्षेप, नाभिक का विघटन और टक्करों के प्रश्न हल होते हैं। आवेग = संवेग परिवर्तन = F·Δt — कैच लेते समय हाथ पीछे खींचने से Δt बढ़ता है और बल घटता है।

5.8–5.9 साम्यावस्था और सामान्य बल

साम्यावस्था में नेट बल शून्य होता है। सामान्य बल: तनाव (डोरी में, दोनों ओर बराबर), अभिलंब प्रतिक्रिया (संपर्क तल के लंबवत), घर्षण (गति का विरोध, स्थैतिक घर्षण स्वयं समायोजी है, सीमा μₛN तक)। ध्यान रहे: mg = R केवल तभी सही है जब पिंड साम्यावस्था में हो — त्वरित लिफ्ट में R = m(g ± a) हो जाता है।

5.10 वृत्तीय गति

वृत्तीय गति के लिए केंद्र की ओर त्वरण v²/r चाहिए, जिसे कोई वास्तविक बल (तनाव, गुरुत्व, घर्षण, अभिलंब) प्रदान करता है — ‘अपकेंद्र बल’ कोई नया बल नहीं, केवल घूमते तंत्र में दिखने वाला आभासी प्रभाव है। मोड़ पर ढाल-कोण: tan θ = v²/(rg); घूमते बेलन में व्यक्ति तभी चिपका रहता है जब μN ≥ mg हो, अर्थात् ω ≥ √(g/μr)।

5.11 यांत्रिकी की समस्याएँ हल करना

विधि: (i) निकाय चुनो, (ii) मुक्त पिंड आरेख बनाओ — सभी बाह्य बल दिखाओ, (iii) अक्ष चुनकर F = ma के घटक लिखो, (iv) बंधन (जैसे डोरी की लंबाई नियत) लागू करो। डोरी टूटने पर पत्थर स्पर्शरेखा की दिशा में उड़ जाता है, त्रिज्य बाहर की ओर नहीं।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

नियमकथन
पहलाजड़त्व — अवस्था बनी रहती है
दूसराF = ma
तीसराक्रिया = विपरीत प्रतिक्रिया

गति के नियम — बल और गति

चित्र 1: चित्र 1 में बल के चारों ओर उससे जुड़ी राशियाँ दिखाई गई हैं — यही इस अध्याय का केंद्रीय विचार है।

गति के नियम — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

मुक्त पिंड आरेख: गुटके पर लगते बल

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): मुक्त पिंड आरेख: गुटके पर लगते बल

मुख्य शब्द / Key Terms

  • जड़त्व: अवस्था बदलने का विरोध करने का गुण।
  • संवेग: द्रव्यमान × वेग।
  • घर्षण: सतहों के बीच गति का विरोध।
  • तनाव: डोरी में खिंचाव का बल।
  • आवेग: बल × समय = संवेग में बदलाव।
  • जड़त्व: वस्तु का अपनी गति की अवस्था बनाए रखने का गुण; द्रव्यमान इसका माप है।
  • आवेग: बल × समय = संवेग परिवर्तन (J = F·Δt = Δp)।
  • स्थैतिक घर्षण: स्वयं समायोजी बल, सीमा μₛN तक; गतिज घर्षण लगभग नियत μₖN होता है।
  • अपकेंद्र बल: घूमते (अजड़त्वीय) तंत्र में प्रतीत होने वाला आभासी बल; जड़त्वीय तंत्र में इसका कोई अस्तित्व नहीं।
  • आभासी भार: लिफ्ट में तुला का पाठ्यांक — त्वरित लिफ्ट में m(g ± a), मुक्त रूप से गिरती लिफ्ट में शून्य।

याद रखें

  • बल का SI मात्रक न्यूटन है।
  • संवेग संरक्षण तभी लागू होता है जब बाहरी बल शून्य हो।
  • क्रिया-प्रतिक्रिया अलग-अलग वस्तुओं पर लगती है।
  • घर्षण का मान सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है।
  • मुक्त वस्तु आरेख (free-body diagram) पहले बनाएँ, फिर समीकरण लिखें।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: क्रिया और प्रतिक्रिया को एक ही वस्तु पर मानकर उन्हें काट देना। वे कभी एक वस्तु पर नहीं लगतीं, इसलिए उनका योग शून्य नहीं होता।

जानकारी — ‘ma’ बल नहीं है

F = ma में ma को एक अलग बल समझना सबसे आम भ्रांति है। मुक्त पिंड आरेख में केवल वास्तविक बल (भार, तनाव, अभिलंब, घर्षण) दिखाओ; ma तो उन बलों का परिणाम है, आरेख का हिस्सा नहीं।

चेतावनी — mg = R कब गलत है

मेज़ पर रखे पिंड के लिए mg = R केवल साम्यावस्था में सही है। ऊपर त्वरित लिफ्ट में R = m(g + a), नीचे त्वरित में R = m(g − a), और मुक्त रूप से गिरती लिफ्ट में R = 0 (भारहीनता) हो जाता है।

टिप — घर्षण की सीमा पहले जाँचो

किसी पिंड के साथ चलने (न फिसलने) के प्रश्न में पहले आवश्यक घर्षण (ma) निकालो और अधिकतम स्थैतिक घर्षण (μₛN) से तुलना करो — आवश्यक बल सीमा से अधिक हो तो पिंड फिसलेगा, जैसे ट्रक वाला संदूक (प्रश्न 5.36)।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. न्यूटन का पहला नियम क्या कहता है? संकेत: बाहरी बल न हो तो अवस्था बनी रहती है।
  2. संवेग का सूत्र लिखिए। संकेत: p = mv।
  3. घर्षण के दो प्रकार कौनसे हैं? संकेत: स्थैतिक और गतिक घर्षण।
  4. रॉकेट किस सिद्धांत पर चलता है? संकेत: संवेग संरक्षण पर।
  5. बल का SI मात्रक क्या है? संकेत: न्यूटन।

मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A

  1. बिना बल के चलती वस्तु क्यों नहीं रुकती? उत्तर: जड़त्व के कारण — एकसमान वेग बनाए रखना वस्तु की स्वाभाविक अवस्था है; दैनिक जीवन में घर्षण उसे रोकता है, बल की अनुपस्थिति नहीं।
  2. क्रिया-प्रतिक्रिया एक-दूसरे को क्यों नहीं निरस्त करतीं? उत्तर: क्योंकि वे भिन्न पिंडों पर लगती हैं — क्रिया एक पिंड पर, प्रतिक्रिया दूसरे पर।
  3. लिफ्ट ऊपर त्वरित हो तो तुला का पाठ्यांक क्या होगा? उत्तर: m(g + a) — व्यक्ति को अपना भार बढ़ा हुआ प्रतीत होगा।
  4. डोरी टूटने पर घूमता पत्थर किस दिशा में जाएगा? उत्तर: टूटने के क्षण की स्पर्शरेखा की दिशा में — त्रिज्य बाहर की ओर नहीं।
  5. मुक्त रूप से गिरती लिफ्ट में व्यक्ति का आभासी भार क्या है? उत्तर: शून्य — व्यक्ति भारहीनता महसूस करेगा।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. चलती बस के अचानक रुकने पर यात्री आगे क्यों झुकता है? उत्तर: जड़त्व के कारण शरीर की गति बनी रहती है।
  2. दो वस्तुओं की टक्कर में संवेग संरक्षण कैसे लागू करें? उत्तर: टक्कर से पहले का कुल संवेग = टक्कर के बाद का कुल संवेग।
  3. हल्की डोरी में तनाव क्यों समान माना जाता है? उत्तर: क्योंकि डोरी का द्रव्यमान नगण्य होता है।
  4. आनत तल पर भार के घटक कैसे बनते हैं? उत्तर: mg cos θ तल के लंबवत और mg sin θ तल के समांतर।
  5. आवेग और संवेग में क्या संबंध है? उत्तर: आवेग = संवेग में बदलाव।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।

  1. 5.1 नेट बल: (a) एकसमान चाल से नीचे गिरती वर्षा की बूँद — 0 (नियत वेग)। (b) पानी पर तैरता 10 g का कॉर्क — 0 (साम्यावस्था)। (c) आकाश में स्थिर रोकी गई पतंग — 0 (स्थिर)। (d) 30 km/h के एकसमान वेग से ऊबड़-खाबड़ सड़क पर चलती कार — 0 (नियत वेग)। (e) सभी गुरुत्वीय पिंडों से दूर, वैद्युत-चुंबकीय क्षेत्रों से मुक्त अंतरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन — 0 (कोई बल ही नहीं लग रहा)।
  2. 5.2 0.05 kg का कंकड़ ऊपर फेंका गया (g = 10 m/s², वायु प्रतिरोध नगण्य): (a) ऊपर जाते समय नेट बल = 0.5 N नीचे की ओर। (b) नीचे आते समय भी 0.5 N नीचे की ओर। (c) उच्चतम बिंदु पर, क्षणिक विराम में भी, 0.5 N नीचे की ओर (वेग शून्य होने से बल शून्य नहीं हो जाता)। यदि कंकड़ को क्षैतिज से 45° पर फेंका जाए, तो भी उत्तर यही रहेगा — बल हमेशा mg नीचे की ओर ही है।
  3. 5.3 0.1 kg का पत्थर: (a) स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत बाद नेट बल = 1 N नीचे की ओर। (b) 36 km/h के एकसमान वेग से चलती रेलगाड़ी से गिराने के तुरंत बाद भी 1 N नीचे की ओर (क्षैतिज बल कोई नहीं, वायु नगण्य)। (c) 1 m/s² से त्वरित रेलगाड़ी से गिराने के तुरंत बाद भी 1 N नीचे की ओर (रेलगाड़ी का त्वरण पत्थर पर अब नहीं लगता)। (d) 1 m/s² से त्वरित रेलगाड़ी के फर्श पर रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में पड़ा पत्थर: नेट बल = ma = 0.1 N रेलगाड़ी के त्वरण की दिशा में (घर्षण द्वारा प्रदान)।
  4. 5.4 सही विकल्प (i) T है — डोरी में तनाव ही कण को केंद्र की ओर अभिकेंद्र बल प्रदान करता है; कण पर नेट बल T (केंद्र की ओर) है, T ± mv²/l नहीं।
  5. 5.5 20 kg के पिंड पर 50 N का स्थायी मंदन बल, प्रारंभिक चाल 15 m/s: रुकने में समय = mv/F = 20×15/50 = 6 s।
  6. 5.6 3.0 kg के पिंड की चाल 25 s में 2.0 से 3.5 m/s होती है: त्वरण = 1.5/25 = 0.06 m/s²; बल = 3.0 × 0.06 = 0.18 N, चाल की दिशा में।
  7. 5.7 5.0 kg के पिंड पर 8 N और 6 N के दो लंबवत बल: नेट बल = √(64 + 36) = 10 N; त्वरण = 10/5 = 2 m/s², दिशा 8 N वाले बल से tan⁻¹(6/8) ≈ 37° पर।
  8. 5.8 ऑटो रिक्शा (400 kg) + चालक (65 kg) = 465 kg; चाल 36 km/h = 10 m/s, 4.0 s में रुकता है: मंदन = 10/4 = 2.5 m/s²; औसत मंदन बल = 465 × 2.5 = 1162.5 N।
  9. 5.9 रॉकेट का उत्थापन द्रव्यमान 20,000 kg, प्रारंभिक त्वरण 5 m/s² ऊपर: प्रणोद F = m(g + a) = 20,000 × 15 = 3.0×10⁵ N।
  10. 5.10 0.40 kg का पिंड उत्तर की ओर 10 m/s से चल रहा है; दक्षिण की ओर 8.0 N का बल 30 s तक लगता है: a = −20 m/s² (उत्तर धनात्मक), x(t) = 10t − 10t²। t = −5 s पर x = −300 m (300 m दक्षिण); t = 25 s पर x = −6000 m; t = 100 s पर बल 30 s के बाद हट चुका है — 30 s पर v = −590 m/s, x = −8700 m; फिर एकसमान गति से x(100) = −8700 − 590×70 = −50,000 m।
  11. 5.11 ट्रक विराम से 2.0 m/s² से त्वरित है; t = 10 s पर 6 m ऊँचाई से पत्थर गिराया जाता है। t = 11 s पर: (a) पत्थर का क्षैतिज वेग = ट्रक का वेग = 20 m/s, ऊर्ध्व वेग = 10 m/s (1 s तक g से गिरकर) — कुल वेग = √500 ≈ 22.4 m/s, क्षैतिज से 26.6° नीचे। (b) त्वरण = g = 10 m/s² ऊर्ध्व नीचे की ओर।
  12. 5.12 2 m लंबी डोरी से लटका 0.1 kg का गोलक, माध्य स्थिति में चाल 1 m/s: (a) चरम स्थिति में डोरी काटने पर गोलक क्षणिक विराम में है, अतः वह ऊर्ध्व नीचे गिरेगा (सीधी रेखा में)। (b) माध्य स्थिति में डोरी काटने पर उसके पास क्षैतिज वेग 1 m/s है, अतः वह परवलयी प्रक्षेप्य पथ पर जाएगा।
  13. 5.13 70 kg का व्यक्ति लिफ्ट में तुला पर खड़ा है (g = 10 m/s²): (a) 10 m/s की एकसमान चाल से ऊपर जाती लिफ्ट में पाठ्यांक = 700 N। (b) 5 m/s² से नीचे त्वरित लिफ्ट में = 70×(10 − 5) = 350 N। (c) 5 m/s² से ऊपर त्वरित लिफ्ट में = 70×(10 + 5) = 1050 N। (d) मशीन खराब होकर लिफ्ट मुक्त रूप से गिरे तो पाठ्यांक = 0 (भारहीनता)।
  14. 5.14 चित्र 5.16 (4 kg का पिंड, x–t ग्राफ़): (a) t < 0, 0 < t < 4 s और t > 4 s — तीनों में वेग नियत (क्रमशः 0, 0.75 m/s, 0) है, अतः बल तीनों में 0 है। (b) आवेग: t = 0 पर Δp = 4 × 0.75 = +3 kg m/s; t = 4 s पर Δp = 4 × (0 − 0.75) = −3 kg m/s।
  15. 5.15 घर्षणरहित मेज़ पर 10 kg (A) और 20 kg (B) पतली डोरी से जुड़े हैं; 600 N का क्षैतिज बल लगता है: त्वरण = 600/30 = 20 m/s² (दोनों स्थितियों में)। (i) बल A पर लगाने पर डोरी में तनाव = 20 × 20 = 400 N। (ii) बल B पर लगाने पर तनाव = 10 × 20 = 200 N।
  16. 5.16 8 kg और 12 kg के पिंड घर्षणरहित घिरनी पर हल्की डोरी से बँधे हैं: त्वरण = (12 − 8)/(12 + 8) × g = 2 m/s²; डोरी में तनाव = 2×8×12/(8 + 12) × g = 96 N।
  17. 5.17 प्रयोगशाला फ्रेम में विराम में नाभिक का कुल संवेग शून्य है। विघटन के बाद बाह्य बल न हो तो कुल संवेग शून्य ही रहेगा, अतः m₁v₁ + m₂v₂ = 0, यानी v₁ और v₂ विपरीत दिशाओं में होंगे — दोनों उत्पाद नाभिक विपरीत दिशाओं में गतिशील होंगे।
  18. 5.18 दो बिलियर्ड गेंदें (प्रत्येक 0.05 kg) 6 m/s से विपरीत दिशाओं में आकर टकराती हैं और उसी चाल से लौटती हैं: प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद का आवेग = Δp = 0.05 × (6 − (−6)) = 0.6 kg m/s (दूसरी गेंद पर बराबर और विपरीत)।
  19. 5.19 100 kg की तोप 0.020 kg का गोला 80 m/s से दागती है: संवेग संरक्षण से तोप का प्रतिक्षेप वेग = −(0.020 × 80)/100 = −0.016 m/s (गोले की विपरीत दिशा में)।
  20. 5.20 बल्लेबाज़ 0.15 kg की गेंद को 45° के कोण पर विक्षेपित करता है; चाल 54 km/h = 15 m/s अपरिवर्तित रहती है: संवेग परिवर्तन = 2 × 0.15 × 15 × sin 45° ≈ 3.18 kg m/s — यही गेंद को दिया गया आवेग है।
  21. 5.21 0.25 kg का पत्थर 1.5 m त्रिज्या के क्षैतिज वृत्त में 40 rev/min से घूमता है: ω = 40×2π/60 ≈ 4.19 rad/s; डोरी में तनाव = mω²r ≈ 6.58 N। यदि डोरी अधिकतम 200 N सह सकती हो, तो अधिकतम चाल = √(200×1.5/0.25) ≈ 34.6 m/s।
  22. 5.22 सही वर्णन (b) है — डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरेखीय पथ पर उड़ जाता है (उस क्षण के वेग की दिशा में); वह झटके के साथ त्रिज्य बाहर की ओर नहीं जाता, और न ही चाल पर निर्भर किसी कोण पर।
  23. 5.23 (a) घोड़ा रिक्त स्थान में गाड़ी खींचकर दौड़ नहीं सकता, क्योंकि उसे आगे बढ़ने के लिए ज़मीन के घर्षण (बाह्य बल) की आवश्यकता होती है; रिक्त स्थान में कोई बाह्य बल नहीं है। (b) तेज़ बस के अचानक रुकने पर यात्री गति के जड़त्व से आगे की ओर गिरते हैं। (c) लॉन मूवर खींचना धकेलने से आसान है, क्योंकि खींचने पर बल का ऊर्ध्व घटक अभिलंब प्रतिक्रिया घटाता है (घर्षण कम), धकेलने पर बढ़ाता है। (d) कैच लेते समय खिलाड़ी हाथ पीछे खींचता है ताकि संवेग परिवर्तन में समय बढ़े और बल घटे (आवेग = F·Δt)।

पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)

ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।

  1. 5.24 चित्र 5.17: 0.04 kg का पिंड x–t ग्राफ़ में त्रिभुजीय तरंग बनाता है — उपयुक्त संदर्भ: दो दीवारों के बीच 1 cm/s की चाल से प्रत्यास्थ रूप से उछलती गेंद (दीवारें 2 cm की दूरी पर हैं)। दो क्रमिक आवेगों के बीच समय-अंतराल = 2 s; प्रत्येक आवेग = Δp = 2mv = 2 × 0.04 × 0.01 = 8×10⁻⁴ kg m/s।
  2. 5.25 65 kg का व्यक्ति 1 m/s² से त्वरित क्षैतिज संवाहक पट्टे पर स्थिर खड़ा है: उस पर नेट बल = ma = 65 N (घर्षण द्वारा)। अधिकतम स्थैतिक घर्षण = 0.2 × 65 × 10 = 130 N, इसलिए पट्टे का त्वरण 2 m/s² तक होने पर भी व्यक्ति पट्टे के सापेक्ष स्थिर रह सकता है।
  3. 5.26 सही विकल्प (i) है — निम्नतम बिंदु पर ऊर्ध्वतः अधोमुखी दिशा में नेट बल = mg − T₁ (ऋणात्मक अर्थात् कुल बल ऊपर की ओर है) और उच्चतम बिंदु पर = mg + T₂ (नीचे की ओर)।
  4. 5.27 हेलीकॉप्टर (कुल 1000 kg, चालक दल + यात्री 300 kg) 15 m/s² से ऊपर उठता है: (a) चालक दल और यात्रियों द्वारा फर्श पर आरोपित बल = 300 × (10 + 15) = 7500 N नीचे की ओर। (b) रोटर द्वारा चारों ओर की वायु पर क्रिया = 1000 × 25 = 25,000 N नीचे की ओर। (c) वायु के कारण हेलीकॉप्टर पर बल = 25,000 N ऊपर की ओर (प्रतिक्रिया)।
  5. 5.28 15 m/s की जलधारा (अनुप्रस्थ काट 10⁻² m²) ऊर्ध्व दीवार से टकराकर वापस नहीं लौटती: प्रति सेकंड द्रव्यमान = 1000 × 10⁻² × 15 = 150 kg/s; दीवार पर बल = संवेग हानि की दर = 150 × 15 = 2250 N।
  6. 5.29 10 सिक्के एक के ऊपर एक रखे हैं (प्रत्येक का द्रव्यमान m): (a) सातवें सिक्के (नीचे से गिनने पर) पर उसके ऊपर के सिक्कों के कारण बल = 3mg नीचे की ओर। (b) सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के द्वारा आरोपित बल = 3mg नीचे की ओर। (c) छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया = 4mg ऊपर की ओर (सातवाँ और उसके ऊपर के तीन सिक्कों का भार)।
  7. 5.30 वायुयान पंखों को क्षैतिज से 15° के झुकाव पर रखकर 720 km/h = 200 m/s से क्षैतिज लूप पूरा करता है: tan 15° = v²/(rg) → r = 200²/(10 × tan 15°) ≈ 14.9 km (g = 10 m/s² से)।
  8. 5.31 रेलगाड़ी (10⁶ kg) बिना ढाल वाले 30 m त्रिज्या के मोड़ पर 54 km/h = 15 m/s से चलती है: आवश्यक अभिकेंद्र बल = 10⁶ × 225/30 = 7.5×10⁶ N — यह बल पटरियाँ (पार्श्व प्रणोद) प्रदान करती हैं, इंजन नहीं। पटरियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए मोड़ का ढाल-कोण tan θ = 225/(30×10) = 0.75 → θ ≈ 36.9° होना चाहिए।
  9. 5.32 50 kg का व्यक्ति 25 kg के गुटके को दो ढंग से उठाता है: (a) रस्सी को सीधे ऊपर खींचकर — व्यक्ति पर रस्सी का नीचे की ओर खिंचाव भी लगता है, अतः फर्श पर क्रिया-बल = 500 + 250 = 750 N। (b) घिरनी पर से रस्सी खींचकर — रस्सी व्यक्ति को ऊपर खींचती है, अतः फर्श पर क्रिया-बल = 500 − 250 = 250 N। फर्श 700 N से अधिक अभिलंब बल पर धँसता है, इसलिए व्यक्ति को ढंग (b) अपनाना चाहिए।
  10. 5.33 40 kg का बंदर 600 N अधिकतम तनाव सह सकने वाली रस्सी पर चढ़ता है (भार 400 N): (a) 6 m/s² से ऊपर चढ़ने पर T = 40×(10 + 6) = 640 N > 600 — रस्सी टूट जाएगी। (b) 4 m/s² से नीचे उतरने पर T = 40×(10 − 4) = 240 N — सुरक्षित। (c) 5 m/s की एकसमान चाल से ऊपर चढ़ने पर T = 400 N — सुरक्षित। (d) लगभग मुक्त रूप से गिरने पर T ≈ 0 — सुरक्षित। अतः रस्सी केवल (a) में टूटेगी।
  11. 5.34 A (5 kg) और B (10 kg) दृढ़ विभाजक दीवार के सामने मेज़ पर विराम में हैं; 200 N का बल A पर क्षैतिज लगता है (μ = 0.15): (a) विभाजक दीवार की प्रतिक्रिया = 200 N। (b) A और B के बीच क्रिया-प्रतिक्रिया बल = 200 N। दीवार हटाने पर निकाय त्वरित होगा: a = (200 − 22.5)/15 ≈ 11.8 m/s²; तब A–B बल = 10 × 11.8 + 15 ≈ 133 N हो जाएगा — अर्थात् (b) का उत्तर बदल जाएगा।
  12. 5.35 15 kg का गुटका लंबी ट्रॉली पर है (μₛ = 0.18); ट्रॉली विराम से 0.5 m/s² से 20 s तक त्वरित होकर फिर एकसमान वेग से चलती है: (a) धरती पर खड़े प्रेक्षक को गुटका ट्रॉली के साथ 0.5 m/s² से त्वरित होता दिखेगा (आवश्यक घर्षण 7.5 N < अधिकतम 27 N, इसलिए गुटका फिसलता नहीं), 20 s बाद 10 m/s की एकसमान चाल से चलता दिखेगा। (b) ट्रॉली के साथ गतिमान प्रेक्षक को गुटका हर समय स्थिर प्रतीत होगा (छद्म बल घर्षण से संतुलित है)।
  13. 5.36 ट्रक का पिछला भाग खुला है; 40 kg का संदूक खुले सिरे से 5 m दूर है (μ = 0.15); ट्रक विराम से 2 m/s² से त्वरित होता है। घर्षण संदूक को अधिकतम 1.5 m/s² ही दे सकता है, इसलिए संदूक ट्रक के सापेक्ष 0.5 m/s² से पीछे सरकता है: 5 m सरकने में समय = √(2×5/0.5) ≈ 4.47 s; इतने समय में ट्रक द्वारा तय दूरी = ½ × 2 × (4.47)² = 20 m — अतः प्रारंभ बिंदु से 20 m चलने पर संदूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा।
  14. 5.37 ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड 33⅓ rev/min (≈ 3.49 rad/s) से घूम रहा है; सिक्के केंद्र से 4 cm और 14 cm पर हैं (μ = 0.15): आवश्यक μ = ω²r/g — 4 cm पर 0.049 < 0.15, अतः यह सिक्का रिकॉर्ड के साथ परिक्रमा करेगा; 14 cm पर 0.17 > 0.15, अतः यह सिक्का फिसलकर बाहर गिर जाएगा।
  15. 5.38 ‘मौत के कुएँ’ में सवार उच्चतम बिंदु पर भी नहीं गिरता, क्योंकि वहाँ भी दीवार का अभिलंब बल और भार मिलकर अभिकेंद्र त्वरण प्रदान करते हैं — जब तक चाल पर्याप्त है, सवार दीवार से सटा रहता है। ऊर्ध्व लूप पूरा करने के लिए उच्चतम बिंदु पर न्यूनतम चाल v = √(gR); R = 25 m के लिए v_min = √250 ≈ 15.8 m/s।
  16. 5.39 70 kg का व्यक्ति 3 m त्रिज्या के बेलन की दीवार से सटा है (μ = 0.15): फर्श हटाने पर भी चिपके रहने के लिए μN ≥ mg चाहिए, जहाँ N = mω²r है — अतः ω ≥ √(g/μr) = √(10/(0.15×3)) ≈ 4.7 rad/s ≈ 45 rev/min न्यूनतम। दी गई 200 rev/min की चाल इससे अधिक है, इसलिए व्यक्ति चिपका रहेगा।
  17. 5.40 R त्रिज्या का पतला वृत्तीय तार ऊर्ध्व व्यास के परितः ω से घूम रहा है; तार में पिरोई मनका के लिए: अभिलंब के घटक N sin θ = mω²R sin θ और N cos θ = mg से cos θ = g/(ω²R) मिलता है। ω ≤ √(g/R) के लिए कोई θ > 0 हल नहीं है — मनका निम्नतम बिंदु पर ही रहती है। ω = 2√(g/R) के लिए cos θ = 1/4, अतः केंद्र से मनके को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्व अधोमुखी दिशा से θ = cos⁻¹(1/4) ≈ 75.5° का कोण बनाता है।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • न्यूटन के तीन नियम: जड़त्व (F = 0 → a = 0), F = ma, क्रिया = −प्रतिक्रिया (भिन्न पिंडों पर)।
  • संवेग संरक्षण: बाह्य बल शून्य हो तो कुल संवेग नियत — रॉकेट, प्रतिक्षेप, टक्कर, विघटन सब इसी से हल होते हैं।
  • आवेग = संवेग परिवर्तन; समय बढ़ाओ तो बल घटेगा — कैच, एयरबैग, गद्दे सब इसी सिद्धांत पर हैं।
  • घर्षण: स्थैतिक स्वयं समायोजी (सीमा μₛN); आवश्यक घर्षण की सीमा से तुलना किए बिना ‘साथ चलेगा’ मत मानो।
  • वृत्तीय गति में अभिकेंद्र बल कोई नया बल नहीं — तनाव, घर्षण, अभिलंब या गुरुत्व में से कोई एक ही यह भूमिका निभाता है।
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