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Class 11 • Physics • Bhautiki Bhag-1

Chapter 3: समतल में गति

सदिश, प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print: browser से PDF save कर सकते हैं। यह कोई textbook PDF नहीं है।

समतल में गति — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics)  |  Chapter 3  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

सदिश और अदिश

जिन राशियों में परिमाण के साथ दिशा भी ज़रूरी हो, वे सदिश कहलाती हैं, जैसे वेग और बल। केवल परिमाण वाली राशियाँ अदिश हैं, जैसे चाल और द्रव्यमान।

दो सदिशों को जोड़ने के लिए त्रिभुज नियम या समांतर चतुर्भुज नियम अपनाया जाता है। किसी सदिश को उसके घटकों में तोड़ना समतल गति की समस्याओं को सरल बना देता है।

प्रक्षेप्य गति

जब किसी वस्तु को तिरछा फेंका जाता है, तो वह गुरुत्व के कारण परवलयाकार पथ पर चलती है। क्षैतिज दिशा में वेग स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर दिशा में वेग g के कारण बदलता है।

अधिकतम ऊँचाई, उड्डयन काल और परास के सूत्र प्रारंभिक वेग और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करते हैं। 45° के कोण पर परास सबसे अधिक होता है।

वृत्तीय गति

एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर रहती है, पर दिशा बदलने के कारण वेग बदलता है, इसलिए अभिकेंद्र त्वरण केंद्र की ओर लगता है।

अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r होता है। आपेक्षिक वेग में प्रेक्षक की अपनी गति का भी ध्यान रखना पड़ता है, जैसे चलती नाव से नदी पार करना।

इस अध्याय का विचार: समतल में गति दो स्वतंत्र एकविमीय गतियों का योग है — x और y दिशाओं की गतियाँ अलग-अलग चलती हैं, और उनका सदिश योग ही वास्तविक गति देता है। प्रक्षेप्य का पथ परवलय इसीलिए बनता है कि क्षैतिज वेग नियत रहता है और ऊर्ध्व वेग g से बदलता है।

पुस्तक की संरचना: अध्याय अदिश–सदिश भेद, सदिश योग/व्यवकलन, वियोजन, अदिश और सदिश गुणनफल से शुरू होकर समतल में गति, प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (अभिकेंद्र त्वरण) तक जाता है।

4.1–4.2 अदिश और सदिश

अदिश में केवल परिमाण होता है (द्रव्यमान, चाल, कार्य, धारा, ताप); सदिश में परिमाण और दिशा दोनों (वेग, बल, विस्थापन, आवेग, कोणीय वेग)। परिमाण और दिशा होना ही पर्याप्त नहीं है — सदिश को सदिश योग नियम का पालन भी करना चाहिए; इसलिए धारा (दिशा सहित) अदिश है और परिमित घूर्णन सदिश नहीं है।

4.3 सदिशों का योग और व्यवकलन

त्रिभुज नियम: सदिशों को सिरे से पूँछ मिलाकर जोड़ो; परिणामी पहली की पूँछ से अंतिम के सिरे तक होता है। समांतर चतुर्भुज नियम भी यही देता है। व्यवकलन: a − b = a + (−b)। त्रिभुज असमिकाएँ: |a + b| ≤ |a| + |b| (बराबरी जब a ∥ b समान दिशा में), |a + b| ≥ ||a| − |b|| (बराबरी जब विपरीत दिशा में)।

4.4–4.6 सदिश का अदिश से गुणा, वियोजन, त्रिविमीय सदिश

सदिश को अदिश से गुणा करने पर परिमाण गुणा हो जाता है, दिशा ऋणात्मक अदिश से पलट जाती है (जैसे संवेग p = mv)। किसी सदिश के घटक: A_x = A cos θ, A_y = A sin θ। त्रिविम में A = A_x i + A_y j + A_z k, परिमाण √(A_x² + A_y² + A_z²)। एकांक सदिश i, j, k अक्षों की दिशाएँ दर्शाते हैं।

4.7–4.8 अदिश और सदिश गुणनफल

अदिश गुणनफल: a·b = ab cos θ (कार्य W = F·s इसी का उदाहरण है)। सदिश गुणनफल: a×b का परिमाण ab sin θ, दिशा दक्षिणावर्त पेंच नियम से दोनों के तल के लंबवत (बल-आघूर्ण τ = r×F, कोणीय संवेग L = r×p इसी के उदाहरण हैं)। a×b = −(b×a); समांतर सदिशों का सदिश गुणनफल शून्य होता है।

4.9–4.10 समतल में स्थिति, वेग और त्वरण

स्थिति सदिश r(t) = x(t) i + y(t) j; वेग v = dr/dt, त्वरण a = dv/dt — प्रत्येक घटक स्वतंत्र रूप से चलता है। किसी बिंदु पर वेग सदिश हमेशा पथ की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। एकसमान त्वरण के समीकरण घटक-वार लागू होते हैं।

4.11 प्रक्षेप्य गति

प्रक्षेप्य (u, कोण θ₀): क्षैतिज वेग u cos θ₀ नियत; ऊर्ध्व वेग u sin θ₀ − gt। पथ: y = x tan θ₀ − (g x²)/(2u²cos²θ₀) — परवलय। उड्डयन काल T = 2u sin θ₀/g; अधिकतम ऊँचाई H = u²sin²θ₀/(2g); परास R = u²sin 2θ₀/g (45° पर अधिकतम)। प्रक्षेपण कोण θ₀ = tan⁻¹(4H/R) भी होता है।

4.12 एकसमान वृत्तीय गति

चाल नियत, पर दिशा निरंतर बदलती है, इसलिए त्वरण शून्य नहीं होता: अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r, हमेशा केंद्र की ओर। कोणीय वेग ω = v/r; आवर्तकाल T = 2π/ω। असमान वृत्तीय गति में स्पर्शरेखीय त्वरण भी जुड़ जाता है, इसलिए कुल त्वरण केंद्र की ओर नहीं रहता।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

गतिमुख्य विशेषता
प्रक्षेप्यपरवलयाकार पथ
एकसमान वृत्तीयअभिकेंद्र त्वरण केंद्र की ओर
आपेक्षिकप्रेक्षक की गति भी जुड़ती है

समतल में गति — प्रक्षेप्य का पथ

चित्र 1: चित्र 1 में प्रक्षेप्य का परवलयाकार पथ दिखाया गया है — क्षैतिज दूरी और ऊँचाई अक्षों पर अंकित हैं।

समतल में गति — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

प्रक्षेप्य गति: परवलय, अधिकतम ऊँचाई और परास

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): प्रक्षेप्य गति: परवलय, अधिकतम ऊँचाई और परास

मुख्य शब्द / Key Terms

  • सदिश: परिमाण और दिशा दोनों वाली राशि।
  • अदिश: केवल परिमाण वाली राशि।
  • प्रक्षेप्य: गुरुत्व के अधीन फेंकी गई वस्तु।
  • परास: प्रक्षेप्य द्वारा तय की गई क्षैतिज दूरी।
  • अभिकेंद्र त्वरण: वृत्त के केंद्र की ओर लगने वाला त्वरण।
  • परिणामी सदिश: दो या अधिक सदिशों के योग से बना एकल सदिश; त्रिभुज/समांतर चतुर्भुज नियम से मिलता है।
  • वियोजन: किसी सदिश को दो (या तीन) लंबवत घटकों में बाँटना; घटक अदिश होते हैं।
  • अभिकेंद्र त्वरण: वृत्तीय गति में केंद्र की ओर लगने वाला त्वरण, a = v²/r।
  • प्रक्षेप्य: केवल गुरुत्व के अधीन गति करता पिंड; वायु प्रतिरोध नगण्य मानने पर पथ परवलय होता है।
  • मुक्त सदिश बनाम बद्ध सदिश: विस्थापन जैसा सदिश स्थान से स्वतंत्र होता है; बल जैसा सदिश क्रिया-बिंदु से बँधा होता है।

याद रखें

  • सदिश जोड़ते समय दिशा का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी है।
  • प्रक्षेप्य में क्षैतिज वेग पूरे समय स्थिर रहता है।
  • 45° पर परास अधिकतम होता है।
  • वृत्तीय गति में चाल स्थिर भी हो, तो भी त्वरण होता है।
  • घटकों में तोड़ने से दो दिशाओं की गति अलग-अलग हल होती है।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई पर वेग को शून्य मान लेना। वहाँ केवल ऊर्ध्वाधर वेग शून्य होता है, क्षैतिज वेग बना रहता है।

जानकारी — प्रक्षेप्य के तीन सूत्र एक साथ याद रखें

T = 2u sinθ/g, H = u²sin²θ/2g, R = u²sin2θ/g — तीनों में g हर में है और कोण का काम sin/cos से चलता है। परास 45° पर अधिकतम और θ व (90°−θ) पर बराबर होता है।

चेतावनी — ‘दिशा है तो सदिश’ गलत है

धारा की दिशा होती है पर वह अदिश है (तार के मोड़ पर धाराएँ अदिश योग से जुड़ती हैं); परिमित घूर्णन की दिशा होती है पर वह सदिश नहीं है (दो परिमित घूर्णनों का क्रम परिणाम बदल देता है)। सदिश होने के लिए सदिश योग नियम का पालन ज़रूरी है।

टिप — सदिश प्रश्नों में पहले घटक लिखो

किसी भी सदिश प्रश्न में पहले x और y घटक अलग-अलग लिख लो — समतल की गति दो स्वतंत्र एकविमीय गतियों में बँट जाती है और उत्तर सीधा निकलता है।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. सदिश और अदिश में अंतर बताइए। संकेत: सदिश में दिशा ज़रूरी है, अदिश में केवल परिमाण।
  2. प्रक्षेप्य का पथ कैसा होता है? संकेत: परवलयाकार।
  3. परास किस कोण पर अधिकतम होता है? संकेत: 45° पर।
  4. अभिकेंद्र त्वरण किस दिशा में लगता है? संकेत: वृत्त के केंद्र की ओर।
  5. प्रक्षेप्य में क्षैतिज वेग क्यों स्थिर रहता है? संकेत: क्योंकि क्षैतिज दिशा में कोई त्वरण नहीं लगता।

मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A

  1. दो सदिशों a और b के योग का परिमाण कब अधिकतम होता है? उत्तर: जब वे समान दिशा में समांतर हों — तब |a + b| = |a| + |b|।
  2. प्रक्षेप्य का परास किन दो कोणों पर बराबर होता है? उत्तर: θ और (90° − θ) पर, क्योंकि sin 2θ = sin(180° − 2θ)।
  3. एकसमान वृत्तीय गति में चाल नियत होने पर भी त्वरण क्यों होता है? उत्तर: वेग की दिशा निरंतर बदलती है, इसलिए dv/dt ≠ 0; त्वरण v²/r केंद्र की ओर होता है।
  4. कार्य अदिश है या सदिश? उत्तर: अदिश — यह बल और विस्थापन का अदिश गुणनफल W = F·s है।
  5. बल-आघूर्ण की दिशा कैसे तय होती है? उत्तर: τ = r × F से, दक्षिणावर्त पेंच नियम से — r से F की ओर पेंच घुमाने पर पेंच जिस दिशा में बढ़े, वही τ की दिशा है।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. अधिकतम ऊँचाई पर प्रक्षेप्य का वेग कितना होता है? उत्तर: केवल क्षैतिज घटक बचता है; ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है।
  2. अभिकेंद्र त्वरण का सूत्र लिखिए। उत्तर: a = v²/r।
  3. दो सदिशों के जोड़ का त्रिभुज नियम क्या है? उत्तर: एक सदिश के सिरे पर दूसरे का पुच्छ रखकर, पहले के पुच्छ से दूसरे के सिरे तक खींचा गया सदिश योग होता है।
  4. नदी पार करते समय नाव का आपेक्षिक वेग क्यों ज़रूरी है? उत्तर: क्योंकि पानी की गति नाव की दिशा को बदल देती है।
  5. एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर क्यों रहती है? उत्तर: क्योंकि अभिकेंद्र बल वेग की दिशा बदलता है, परिमाण नहीं।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।

  1. 4.1 अदिश: आयतन, द्रव्यमान, चाल, घनत्व, मोल संख्या, कोणीय आवृत्ति। सदिश: त्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग।
  2. 4.2 सूची में से दो अदिश: कार्य और धारा (बाकी — बल, कोणीय संवेग, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आघूर्ण, आपेक्षिक वेग — सभी सदिश हैं)।
  3. 4.3 सूची में एकमात्र सदिश आवेग है (ताप, दाब, ऊर्जा, समय, गुरुत्वीय विभव, वैद्युत विभव, आवेश आदि सभी अदिश हैं)।
  4. 4.4 (a) अदिश को सदिश में जोड़ना — अर्थहीन। (b) समान विमाओं वाले सदिश को अदिश में जोड़ना — अर्थहीन। (c) सदिश को अदिश से गुणा करना — अर्थपूर्ण (जैसे m·a = F)। (d) दो अदिशों को गुणा करना — अर्थपूर्ण। (e) दो सदिशों को जोड़ना — अर्थपूर्ण (समान विमा होने पर)। (f) सदिश के घटक को उसी सदिश में जोड़ना — अर्थहीन (घटक अदिश है)।
  5. 4.5 (a) सत्य — सदिश का परिमाण हमेशा अदिश होता है। (b) सत्य — सदिश का प्रत्येक घटक अदिश होता है। (c) असत्य — पथ-लंबाई विस्थापन के परिमाण से बड़ी हो सकती है (दिशा बदलने पर)। (d) सत्य — औसत चाल ≥ |औसत वेग|। (e) सत्य — तीन असमतलीय सदिशों का योग शून्य नहीं हो सकता (शून्य योग के लिए उनका समतलीय होना ज़रूरी है)।
  6. 4.6 (a) |a + b| ≤ |a| + |b| — बराबरी जब a और b समान दिशा में समांतर हों। (b) |a + b| ≥ ||a| − |b|| — बराबरी जब विपरीत दिशा में समांतर हों। (c) |a − b| ≤ |a| + |b| — बराबरी जब a और b विपरीत दिशा में हों। (d) |a − b| ≥ ||a| − |b|| — बराबरी जब समान दिशा में हों।
  7. 4.7 a + b + c + d = 0 से: (a) असत्य — चारों का शून्य सदिश होना ज़रूरी नहीं (वे एक-दूसरे को निरस्त कर सकते हैं)। (b) सत्य — a + c = −(b + d), इसलिए दोनों के परिमाण बराबर हैं। (c) सत्य — त्रिभुज असमिका से |a| ≤ |b| + |c| + |d|। (d) सत्य — b + c = −(a + d) है, और a, d संरेख हों तो a + d उसी रेखा पर है, अतः b + c, a–d के तल में है।
  8. 4.8 तीनों लड़कियाँ वृत्तीय बर्फ़ीली सतह (त्रिज्या 200 m) पर P से व्यासतः विपरीत बिंदु Q तक भिन्न पथों से जाती हैं — तीनों का विस्थापन समान है: 400 m, P से Q की दिशा में; तय की गई पथ-लंबाइयाँ भिन्न-भिन्न हैं।
  9. 4.9 साइकिल सवार केंद्र O से किनारे P (1 km) तक, फिर परिधि पर Q तक (चतुर्थांश चाप ≈ 1.57 km), फिर केंद्र O तक लौटता है; कुल समय 10 मिनट। (a) कुल विस्थापन 0 (वापस O पर)। (b) औसत वेग 0। (c) कुल पथ ≈ 3.57 km, औसत चाल = 3.57 ÷ (1/6) ≈ 21.4 km/h।
  10. 4.10 मोटर चालक प्रत्येक 500 m पर 60° बाएँ मुड़ता है (षट्भुज पथ): (a) तीसरे मोड़ के बाद विस्थापन 1000 m। (b) छठे मोड़ के बाद 0 (वापस प्रारंभ पर)। (c) आठवें मोड़ के बाद = दो भुजाओं के योग का परिमाण = 866 m।
  11. 4.11 होटल 10 km दूर है; टैक्सी 23 km घुमावदार रास्ते से 28 मिनट में पहुँचाती है: (a) औसत चाल = 23 ÷ (28/60) ≈ 49.3 km/h। (b) औसत वेग का परिमाण = 10 ÷ (28/60) ≈ 21.4 km/h।
  12. 4.12 वर्षा 30 m/s से ऊर्ध्व नीचे गिर रही है; महिला 10 m/s से उत्तर से दक्षिण जा रही है। वर्षा का उसके सापेक्ष वेग ऊर्ध्व से tan⁻¹(10/30) ≈ 18° झुका हुआ प्रतीत होगा — छाता ऊर्ध्व से 18° झुकाकर, गति की दिशा (दक्षिण) की ओर रखना चाहिए।
  13. 4.13 तैराक स्थिर पानी में 4.0 km/h से तैरता है; नदी 1.0 km चौड़ी, प्रवाह 3.0 km/h, तैराक प्रवाह के लंबवत तैरता है। पार करने में समय = 1.0/4.0 = 0.25 h = 15 मिनट; बहाव = 3.0 × 0.25 = 0.75 km नीचे की ओर।
  14. 4.14 हवा 72 km/h से उत्तर-पूर्व की ओर चल रही है (घटक ≈ 50.9 km/h पूर्व + 50.9 km/h उत्तर); नौका उत्तर की ओर 51 km/h से चल पड़ती है। नौका के सापेक्ष हवा का वेग ≈ 50.9 km/h पूर्व की ओर रह जाता है — अतः झंडा लगभग पूर्व दिशा में लहराएगा।
  15. 4.15 हॉल की छत 25 m ऊँची है; गेंद 40 m/s से फेंकी जाती है। छत से न टकराने के लिए u²sin²θ/(2g) ≤ 25 → sin θ ≤ 0.553 → θ ≤ 33.6°। इस कोण पर परास = 1600 × sin 67.2° ÷ 9.8 ≈ 150 m — यही अधिकतम क्षैतिज दूरी है।
  16. 4.16 खिलाड़ी गेंद को अधिकतम 100 m दूर फेंक सकता है, अतः u²/g = 100। ऊर्ध्व फेंकने पर अधिकतम ऊँचाई = u²/(2g) = 50 m।
  17. 4.17 80 cm की डोरी से पत्थर 25 s में 14 चक्कर लगाता है: ω = 2π×14/25 ≈ 3.52 rad/s; त्वरण = ω²r ≈ 12.38 × 0.8 ≈ 9.9 m/s², केंद्र की ओर।
  18. 4.18 वायुयान 900 km/h = 250 m/s से 1.00 km त्रिज्या का क्षैतिज लूप बनाता है: अभिकेंद्र त्वरण = 250²/1000 = 62.5 m/s² ≈ 6.4g।
  19. 4.19 (a) असत्य — वृत्तीय गति में कुल त्वरण हमेशा केंद्र की ओर नहीं होता; असमान वृत्तीय गति में स्पर्शरेखीय घटक भी होता है (केवल एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण शुद्ध अभिकेंद्र होता है)। (b) सत्य — किसी बिंदु पर वेग सदिश हमेशा पथ की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। (c) सत्य — एकसमान वृत्तीय गति में एक चक्र के बाद वेग सदिश पहले जैसा हो जाता है, अतः औसत त्वरण शून्य सदिश है।
  20. 4.20 r = (3.0t² i − 2.0t j + 4.0 k) m से: (a) v = (6.0t i − 2.0 j) m/s, a = 6.0 i m/s²। (b) t = 2.0 s पर v = 12 i − 2 j; परिमाण = √148 ≈ 12.2 m/s; दिशा x-अक्ष से tan⁻¹(2/12) ≈ 9.5° नीचे (xy-तल में)।
  21. 4.21 कण मूलबिंदु से v = 10 j m/s और a = (8 i + 2 j) m/s² से चलता है: (a) x = 4t² = 16 → t = 2 s; उसी समय y = 10×2 + 4 = 24 m। (b) t = 2 s पर v = 16 i + 14 j; चाल = √452 ≈ 21.3 m/s।
  22. 4.22 A = 2 i + 3 j के (i + j) और (i − j) दिशाओं में घटक: (i + j) दिशा में = A·(i + j)/√2 = 5/√2; (i − j) दिशा में = A·(i − j)/√2 = −1/√2।
  23. 4.23 स्वेच्छ गति के लिए हमेशा सत्य: (b) v_average = [r(t₂) − r(t₁)]/(t₂ − t₁) और (e) a_average = [v(t₂) − v(t₁)]/(t₂ − t₁) (ये परिभाषाएँ हैं)। (a), (c), (d) केवल तभी सत्य हैं जब त्वरण नियत हो।
  24. 4.24 अदिश के बारे में: (a) असत्य — अदिश का संरक्षित होना ज़रूरी नहीं (जैसे ताप बदलता है)। (b) असत्य — अदिश ऋणात्मक हो सकता है (जैसे आवेश, सेल्सियस ताप)। (c) असत्य — अदिश विमायुक्त हो सकता है (जैसे द्रव्यमान)। (d) असत्य — अदिश स्थान के साथ बदल सकता है (जैसे घनत्व)। (e) सत्य — अदिश का मान अक्षों के अभिविन्यास पर निर्भर नहीं करता।
  25. 4.25 वायुयान 3400 m की ऊँचाई पर उड़ रहा है; 10.0 s के अंतराल की दो स्थितियाँ प्रेक्षण बिंदु पर 30° का कोण बनाती हैं। सममित ज्यामिति से 10 s में तय दूरी = 2 × 3400 × tan 15° ≈ 1822 m; अतः चाल ≈ 182 m/s।

पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)

ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।

  1. 4.26 परिमाण और दिशा होने पर भी: सदिश का स्थान मायने रख सकता है — स्थिति सदिश और बल का क्रिया-बिंदु बद्ध होते हैं, जबकि विस्थापन मुक्त सदिश है। सदिश समय के साथ बदल सकता है (जैसे वेग)। समान परिमाण-दिशा वाले दो सदिश अलग स्थानों पर अलग प्रभाव दे सकते हैं — जैसे अलग बिंदुओं पर लगे बराबर बल अलग बल-आघूर्ण उत्पन्न करते हैं।
  2. 4.27 नहीं — परिमाण और दिशा होना सदिश होने के लिए पर्याप्त नहीं है। उदाहरण: परिमित घूर्णन में परिमाण (कोण) और दिशा (अक्ष) दोनों होते हैं, पर वह सदिश नहीं है, क्योंकि दो परिमित घूर्णनों का परिणाम उनके क्रम पर निर्भर करता है (सदिश योग क्रम-विनिमेय होता है)।
  3. 4.28 सदिश संबद्ध किया जा सकता है: (a) लूप में मोड़ी गई तार की लंबाई से — नहीं (लंबाई अदिश है)। (b) किसी समतल क्षेत्रफल से — हाँ (क्षेत्रफल सदिश, दिशा तल के अभिलंबवत)। (c) किसी गोले से — नहीं (गोले से कोई अद्वितीय दिशा नहीं जुड़ती)।
  4. 4.29 गोला 30° पर दागा जाकर 3.0 km दूर गिरता है: u²sin 60°/g = 3.0 → u²/g = 3.46 km। कोण बदलकर भी अधिकतम परास (45° पर) u²/g = 3.46 km ही होगी, जो 5.0 km से कम है — अतः 5.0 km दूर के लक्ष्य को भेदा नहीं जा सकता।
  5. 4.30 लड़ाकू विमान 1.5 km ऊँचाई पर 720 km/h = 200 m/s से क्षैतिज उड़ रहा है; गोला 600 m/s से दागा जाता है। क्षैतिज वेग मिलने के लिए 600 sin θ = 200 → sin θ = 1/3 → θ ≈ 19.5° ऊर्ध्व से। इस प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई = (600 cos θ)²/(2g) = 16 km — इसलिए बचने के लिए विमान को 16 km से अधिक ऊँचाई पर उड़ना चाहिए।
  6. 4.31 साइकिल सवार 27 km/h = 7.5 m/s से 80 m त्रिज्या के मोड़ पर 0.5 m/s² की दर से धीमा होता है: अभिकेंद्र त्वरण = 7.5²/80 ≈ 0.703 m/s²; स्पर्शरेखीय त्वरण 0.5 m/s²; कुल त्वरण = √(0.703² + 0.5²) ≈ 0.86 m/s², दिशा त्रिज्य (केंद्र की ओर) दिशा से tan⁻¹(0.5/0.703) ≈ 35.4° पीछे की ओर झुकी हुई।
  7. 4.32 (a) प्रक्षेप्य का वेग v = (u cos θ₀) i + (u sin θ₀ − gt) j है, इसलिए वेग का x-अक्ष से कोण θ(t) = tan⁻¹[(u sin θ₀ − gt)/(u cos θ₀)] होता है। (b) H = u²sin²θ₀/(2g) और R = u²sin 2θ₀/g से 4H/R = tan θ₀, अतः प्रक्षेपण कोण θ₀ = tan⁻¹(4H/R)।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • सदिश होने के लिए परिमाण + दिशा + सदिश योग नियम — तीनों ज़रूरी हैं (धारा और परिमित घूर्णन इसके अपवाद हैं)।
  • प्रक्षेप्य: T = 2u sinθ/g, H = u²sin²θ/2g, R = u²sin2θ/g; परास 45° पर अधिकतम।
  • एकसमान वृत्तीय गति में त्वरण v²/r केंद्र की ओर; असमान गति में स्पर्शरेखीय घटक भी जुड़ता है।
  • त्रिभुज असमिकाएँ: |a + b| ≤ |a| + |b|, |a + b| ≥ ||a| − |b|| — बराबरी की शर्तें दिशा की समांतरता से तय होती हैं।
  • समतल की गति = दो स्वतंत्र एकविमीय गतियों का योग; घटक-वार हल करना सबसे तेज़ तरीका है।
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