Chapter 2: सरल रेखा में गति
स्थिति, विस्थापन, वेग, त्वरण, ग्राफ़ और शुद्धगतिकी समीकरण — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
सरल रेखा में गति — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics) | Chapter 2 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
स्थिति, दूरी और विस्थापन
सरल रेखा में गति में वस्तु की स्थिति को एक निर्देश बिंदु से दूरी से बताया जाता है। दूरी तय किए गए पूरे पथ की लंबाई है, जबकि विस्थापन आरंभिक और अंतिम स्थिति के बीच का सीधा अंतर है।
दूरी हमेशा धनात्मक होती है, पर विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। यदि वस्तु लौटकर वहीं आ जाए, तो विस्थापन शून्य होगा, भले ही दूरी बहुत बड़ी हो।
वेग, चाल और त्वरण
चाल दूरी के बदलने की दर है और वेग विस्थापन के बदलने की दर है। एकसमान त्वरण वाली गति में वेग समय के साथ सीधी रेखा में बदलता है।
गति के तीन समीकरण — v = u + at, s = ut + ½at² और v² = u² + 2as — एकसमान त्वरण की हर समस्या का आधार हैं। इनमें u प्रारंभिक वेग, v अंतिम वेग, a त्वरण और s विस्थापन है।
ग्राफ़ से पढ़ना
स्थिति-समय ग्राफ़ की ढाल वेग बताती है और वेग-समय ग्राफ़ की ढाल त्वरण बताती है। वेग-समय ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन देता है।
मुक्त रूप से गिरती वस्तु का त्वरण g लगभग 9.8 m/s² होता है और वह नीचे की ओर लगता है।
इस अध्याय का विचार: सरल रेखा में गति में वस्तु की पूरी कहानी उसकी स्थिति x(t) से कही जाती है — x–t ग्राफ़ की ढाल वेग देती है, v–t ग्राफ़ की ढाल त्वरण और उसके नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन देता है।
पुस्तक की संरचना: अध्याय बिंदु-वस्तु की अवधारणा से शुरू होता है, फिर औसत और तात्क्षणिक वेग/चाल का अंतर, त्वरण, एकसमान त्वरण के तीन समीकरण और अंत में आपेक्षिक वेग सिखाता है। ग्राफ़ वाले प्रश्न (3.16–3.22, 3.27–3.28) इसी अध्याय की जान हैं।
3.1 भूमिका — बिंदु वस्तु
जब वस्तु का आकार उसके द्वारा तय की गई दूरी की तुलना में नगण्य हो, तो उसे बिंदु वस्तु मानते हैं — जैसे दो स्टेशनों के बीच चलती रेलगाड़ी। घूमती गेंद या लुढ़कता बीकर बिंदु वस्तु नहीं माना जा सकता, क्योंकि वहाँ घूर्णन/आकार मायने रखता है।
3.2 स्थिति, पथ-लंबाई और विस्थापन
स्थिति x(t) किसी मूलबिंदु से मापी जाती है। पथ-लंबाई वस्तु द्वारा तय किया गया कुल रास्ता है (कभी घट नहीं सकती); विस्थापन Δx = x₂ − x₁ केवल अंतिम और प्रारंभिक स्थिति का अंतर है (धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है)। दिशा बदले बिना चली गति में पथ-लंबाई = |विस्थापन|; दिशा बदलने पर पथ-लंबाई बड़ी होती है।
3.3 औसत वेग और औसत चाल
औसत वेग = विस्थापन ÷ समय = (x₂ − x₁)/(t₂ − t₁); औसत चाल = कुल पथ-लंबाई ÷ समय। इसलिए औसत चाल ≥ |औसत वेग|; बराबरी तभी जब दिशा न बदले। ध्यान रहे: औसत चाल को ‘औसत वेग के परिमाण’ से परिभाषित करना गलत होगा — लौटकर आने पर औसत वेग शून्य हो सकता है, पर औसत चाल नहीं।
3.4 तात्क्षणिक वेग और चाल
तात्क्षणिक वेग v = dx/dt — x–t ग्राफ़ पर किसी क्षण की स्पर्श रेखा की ढाल। तात्क्षणिक चाल = |तात्क्षणिक वेग| हमेशा, क्योंकि अनंत सूक्ष्म अंतराल में दिशा बदलने का मौका नहीं मिलता — यही कारण है कि तात्क्षणिक स्तर पर चाल और वेग के परिमाण का अंतर समाप्त हो जाता है।
3.5 त्वरण
त्वरण a = dv/dt — v–t ग्राफ़ की ढाल। त्वरण का चिह्न अक्ष के चुनाव पर निर्भर करता है: वेग बढ़ रहा हो तो त्वरण वेग की दिशा में, घट रहा हो तो विपरीत दिशा में। किसी क्षण वेग शून्य होने पर भी त्वरण अशून्य हो सकता है (जैसे ऊपर फेंकी गेंद के उच्चतम बिंदु पर a = g नीचे की ओर)।
3.6 एकसमान त्वरण के शुद्धगतिकी समीकरण
एकसमान त्वरण a के लिए: v = u + at; x = x₀ + ut + ½at²; v² = u² + 2a(x − x₀)। ये समीकरण केवल तभी लागू होते हैं जब त्वरण नियत हो — v–t ग्राफ़ के वक्र होने पर (जैसे प्रश्न 3.28) केवल परिभाषाएँ (औसत वेग, औसत त्वरण, वक्र के नीचे का क्षेत्रफल) ही सही रहती हैं।
3.7 आपेक्षिक वेग
वस्तु A का B के सापेक्ष वेग v_AB = v_A − v_B। एक ही दिशा में चलती वस्तुओं के लिए सापेक्ष चाल घट जाती है, विपरीत दिशा में जुड़ जाती है। इसी से रेलगाड़ी, नाव और हवाई जहाज़ के ‘दूसरे के सापेक्ष’ प्रश्न हल होते हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| ग्राफ़ | ढाल क्या देती है |
|---|---|
| स्थिति-समय | वेग |
| वेग-समय | त्वरण |
| त्वरण-समय | वेग में बदलाव |

चित्र 1: चित्र 1 में वेग-समय ग्राफ़ दिखाया गया है — ऊपर जाती रेखा एकसमान त्वरण वाली गति बताती है। अक्षों के लेबल ग्राफ़ पढ़ने में मदद करते हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): स्थिति–समय ग्राफ़: ढाल ही वेग है
मुख्य शब्द / Key Terms
- दूरी: तय किए गए पूरे पथ की लंबाई।
- विस्थापन: आरंभिक से अंतिम स्थिति तक सीधा अंतर।
- चाल: दूरी के बदलने की दर।
- वेग: विस्थापन के बदलने की दर।
- त्वरण: वेग के बदलने की दर।
- बिंदु वस्तु: वह वस्तु जिसका आकार तय की गई दूरी के सामने नगण्य हो और जिसकी गति को एक बिंदु की गति से दर्शाया जा सके।
- विस्थापन: प्रारंभिक से अंतिम स्थिति तक का सदिश अंतर; पथ पर निर्भर नहीं करता।
- तात्क्षणिक वेग: v = dx/dt — अत्यंत छोटे समय अंतराल में औसत वेग की सीमा।
- मंदन: वेग के परिमाण में कमी — यह भी एक त्वरण ही है, केवल वेग के विपरीत दिशा में।
- आपेक्षिक वेग: किसी वस्तु का वेग किसी अन्य गतिमान प्रेक्षक के सापेक्ष मापा गया वेग।
याद रखें
- दूरी और विस्थापन का अंतर हर प्रश्न में पहले पहचानें।
- वेग-समय ग्राफ़ का क्षेत्रफल विस्थापन देता है, दूरी नहीं।
- एकसमान त्वरण में ही गति के तीन समीकरण लागू होते हैं।
- गिरती वस्तु के लिए g का चिह्न दिशा पर निर्भर करता है।
- औसत वेग = कुल विस्थापन / कुल समय होता है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: चाल और वेग को एक समझ लेना। वृत्तीय पथ पर लौटने वाली वस्तु की औसत चाल शून्य नहीं होती, पर औसत वेग शून्य हो सकता है।
x–t की ढाल = वेग; v–t की ढाल = त्वरण; v–t के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। कोई भी ग्राफ़ प्रश्न पहले यह तय करके हल करो कि कौन-सी राशि किस अक्ष पर है — x–t ग्राफ़ कभी वस्तु का पथ नहीं होता (प्रश्न 3.17)।
औसत चाल को औसत वेग के परिमाण के बराबर मान लेना सबसे आम गलती है। घर से बाज़ार जाकर लौटने पर औसत वेग शून्य हो सकता है, पर औसत चाल कभी शून्य नहीं होती — वह कुल पथ ÷ कुल समय है।
एक ही समय पर दो स्थितियाँ (x–t में लूप), एक ही समय पर दो वेग (v–t में वृत्त), ऋणात्मक चाल, और घटती हुई कुल पथ-लंबाई — ये चारों एकविमीय गति को कभी नहीं दर्शा सकते (प्रश्न 3.16)।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- दूरी और विस्थापन में क्या अंतर है? संकेत: दूरी पथ की लंबाई है; विस्थापन सीधा अंतर है।
- वेग-समय ग्राफ़ का क्षेत्रफल क्या बताता है? संकेत: विस्थापन बताता है।
- v = u + at में प्रत्येक अक्षर का अर्थ लिखिए। संकेत: v अंतिम वेग, u प्रारंभिक वेग, a त्वरण, t समय।
- मुक्त पतन में त्वरण कितना होता है? संकेत: लगभग 9.8 m/s² नीचे की ओर।
- एकसमान गति में वेग-समय ग्राफ़ कैसा होता है? संकेत: समय-अक्ष के समांतर सीधी रेखा।
मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A
- x–t ग्राफ़ की ढाल क्या बताती है? उत्तर: तात्क्षणिक वेग — ढाल धनात्मक हो तो वस्तु +x दिशा में, ऋणात्मक हो तो −x दिशा में चल रही है।
- एक वस्तु 20 m आगे जाकर 20 m वापस आ जाती है। विस्थापन और पथ-लंबाई बताइए। उत्तर: विस्थापन 0, पथ-लंबाई 40 m।
- ऊपर फेंकी गेंद के उच्चतम बिंदु पर वेग और त्वरण क्या हैं? उत्तर: वेग 0, त्वरण g = 9.8 m/s² नीचे की ओर (अशून्य)।
- v = u + at का उपयोग कब नहीं कर सकते? उत्तर: जब त्वरण नियत न हो — तब केवल v = dx/dt और a = dv/dt की परिभाषाएँ काम करती हैं।
- दो रेलगाड़ियाँ एक ही दिशा में 20 m/s से चल रही हैं। एक का दूसरी के सापेक्ष वेग क्या है? उत्तर: 0 — सापेक्ष वेग v_A − v_B = 0।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- एक वस्तु 100 m जाकर लौट आती है। दूरी और विस्थापन बताइए। उत्तर: दूरी 200 m, विस्थापन शून्य।
- u = 0, a = 2 m/s², t = 5 s हो तो v कितना होगा? उत्तर: v = 0 + 2×5 = 10 m/s।
- स्थिति-समय ग्राफ़ की ढाल से क्या मिलता है? उत्तर: वेग मिलता है; ढाल जितनी अधिक, वेग उतना अधिक।
- त्वरण शून्य हो तो गति कैसी होती है? उत्तर: एकसमान गति — वेग बदलता नहीं है।
- गति के समीकरण कब लागू नहीं होते? उत्तर: जब त्वरण बदलता रहता है, तब ये समीकरण लागू नहीं होते।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।
- 3.1 बिंदु वस्तु मानी जा सकती है: (a) दो स्टेशनों के बीच बिना झटके चलती रेलगाड़ी — हाँ (आकार दूरी के सामने नगण्य)। (b) वृत्तीय पथ पर साइकिल चलाते व्यक्ति पर बैठा बंदर — हाँ (तय की गई दूरी उसके आकार से बहुत बड़ी है)। (c) ज़मीन से टकराकर तेज़ी से मुड़ने वाली फिरकती क्रिकेट गेंद — नहीं (घूर्णन में आकार मायने रखता है)। (d) मेज़ के किनारे से फिसलकर गिरा बीकर — नहीं (वह लुढ़क सकता है, आकार/घूर्णन महत्त्वपूर्ण है)।
- 3.2 चित्र 3.19 के x–t ग्राफ़ से: (a) B, A की तुलना में विद्यालय से निकट रहता है (B का अंतिम x छोटा है)। (b) B, A की तुलना में विद्यालय से बाद में चलता है। (c) B, A की तुलना में तेज़ चलता है (B की रेखा की ढाल अधिक है)। (d) A और B एक ही समय पर घर पहुँचते हैं। (e) B, सड़क पर A से एक बार आगे निकल जाता है (रेखाएँ एक बार काटती हैं)।
- 3.3 महिला का x–t ग्राफ़: प्रातः 9:00 से 9:30 तक रेखा 0 से 2.5 km तक उठती है (5 km/h), सायं 5:00 तक क्षैतिज (कार्यालय में ठहराव), फिर 25 km/h से 0.1 h = 6 मिनट में 0 तक गिरती है (सायं 5:06 पर घर वापसी)।
- 3.4 शराबी प्रत्येक 8 s में 2 m आगे बढ़ता है (5 आगे − 3 पीछे)। 32 s में 8 m; फिर 5 कदम आगे: 33 s → 9 m, 34 s → 10 m, 35 s → 11 m, 36 s → 12 m, 37 s → 13 m — अतः वह 37 s बाद गड्ढे में गिरता है।
- 3.5 जेट यान 500 km/h से चल रहा है; दहन उत्पाद जेट यान के सापेक्ष 1500 km/h से पीछे निकलते हैं। ज़मीन पर खड़े प्रेक्षक के सापेक्ष उनकी चाल = 500 − 1500 = −1000 km/h, अर्थात् 1000 km/h विपरीत दिशा में।
- 3.6 कार की चाल 126 km/h = 35 m/s; 200 m में रुकती है। मंदन a = −v²/(2s) = −1225/400 = −3.06 m/s²; रुकने में समय t = 35/3.06 ≈ 11.4 s।
- 3.7 दोनों गाड़ियाँ 72 km/h = 20 m/s से चल रही हैं; B 1 m/s² से त्वरित होता है। 50 s में B की A के सापेक्ष विस्थापन = ½×1×50² = 1250 m। अतः B के गार्ड और A के चालक के बीच आरंभिक दूरी 1250 m थी — यानी दोनों गाड़ियों के बीच का खाली अंतर 1250 − 800 = 450 m था।
- 3.8 C, A तक 1000 m की दूरी 25 m/s की सापेक्ष चाल से 40 s में पहुँचेगी। इतने समय में B को A तक पहुँचने के लिए 1400 m (1000 m + A की 400 m गति) तय करने हैं: 15×40 + ½a×40² = 1400 → a = 1 m/s² न्यूनतम त्वरण।
- 3.9 मान लो बस की चाल v और सेवा-काल T है। एक ही दिशा में: (v − 20)×18 = vT; विपरीत दिशा में: (v + 20)×6 = vT। हल करने पर v = 40 km/h और T = 9 मिनट।
- 3.10 गेंद u = 29 m/s से ऊपर फेंकी गई (g = 9.8 m/s²): (i) ऊपर जाते समय त्वरण नीचे की ओर (g) ही रहता है। (ii) उच्चतम बिंदु पर वेग 0, त्वरण g नीचे की ओर। (iii) उच्चतम बिंदु को x = 0, t = 0 मानकर नीचे की दिशा धनात्मक लेने पर: ऊपर जाते समय x ऋणात्मक, v ऋणात्मक, a धनात्मक; नीचे आते समय x धनात्मक, v धनात्मक, a धनात्मक। (iv) अधिकतम ऊँचाई = 29²/(2×9.8) ≈ 42.9 m; ऊपर जाने में 29/9.8 ≈ 2.96 s, अतः खिलाड़ी के हाथों में लगभग 5.9 s बाद लौटती है।
- 3.11 (a) सत्य — उच्चतम बिंदु पर चाल शून्य पर त्वरण g अशून्य होता है। (b) असत्य — चाल = वेग का परिमाण है, इसलिए चाल शून्य हो तो वेग भी शून्य ही होगा। (c) असत्य — एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर रहकर भी त्वरण अशून्य होता है (दिशा बदलती है)। (d) असत्य — त्वरण धनात्मक होने पर भी यदि वेग ऋणात्मक हो तो चाल घटेगी (अक्ष के चुनाव पर निर्भर)।
- 3.12 गेंद 90 m से गिरती है: पहली टक्कर तक v = √(2×9.8×90) = 42 m/s, समय 4.29 s। प्रत्येक टक्कर में चाल का दसवाँ भाग कम (9/10 रह) जाता है: अगली चोटियाँ 37.8 m/s, 34.0 m/s…। v–t ग्राफ़ ±g ढाल वाली रेखाओं की आरी-दाँत श्रृंखला है, जो t = 12 s के आसपास दूसरी टक्कर तक चलती है।
- 3.13 (a) विस्थापन का परिमाण ≤ पथ-लंबाई; बराबरी तभी जब दिशा न बदले (जैसे सीधी सड़क पर बिना लौटे चलना)। (b) औसत वेग का परिमाण ≤ औसत चाल; बराबरी तभी जब दिशा न बदले। उदाहरण: घर लौटने पर औसत वेग शून्य पर औसत चाल धनात्मक होती है।
- 3.14 व्यक्ति 2.5 km बाज़ार 30 मिनट में जाता है, 20 मिनट में लौटता है: (i) 0–30 मिनट: औसत वेग का परिमाण 5 km/h, औसत चाल 5 km/h। (ii) 0–50 मिनट: औसत वेग 0 (विस्थापन शून्य), औसत चाल 6 km/h। (iii) 0–40 मिनट: औसत वेग का परिमाण 1.875 km/h, औसत चाल 5.625 km/h।
- 3.15 तात्क्षणिक चाल हमेशा तात्क्षणिक वेग के परिमाण के बराबर होती है, क्योंकि तात्क्षणिक वेग अत्यंत छोटे अंतराल Δt → 0 की सीमा से परिभाषित है — इतने छोटे अंतराल में दिशा बदलने का अवसर ही नहीं मिलता, इसलिए पथ-लंबाई और विस्थापन का अंतर समाप्त हो जाता है।
- 3.16 चित्र 3.20 के चारों ग्राफ़ एकविमीय गति को संभवतः नहीं दर्शा सकते: (a) x–t वक्र एक ही t पर दो x देता है (लूप) — असंभव। (b) v–t वृत्त एक ही t पर दो वेग देता है — असंभव। (c) चाल ऋणात्मक दिखाई गई है — चाल कभी ऋणात्मक नहीं होती। (d) कुल पथ-लंबाई घटती दिखाई गई है — पथ-लंबाई कभी घट नहीं सकती।
- 3.17 यह कहना ठीक नहीं है कि कण t < 0 के लिए सरल रेखा में और t > 0 के लिए परवलयी पथ में चलता है — x–t ग्राफ़ पथ नहीं है; एकविमीय गति का पथ हमेशा सरल रेखा ही होता है। सही संदर्भ: कण t = 0 तक विराम में है, फिर एकसमान त्वरण से चलता है (x ∝ t²), जैसे विराम से छोड़ी गई वस्तु का गुरुत्वाधीन गिरना।
- 3.18 गोली की नाल-मुखी चाल 150 m/s = 540 km/h है; पुलिस की गाड़ी के सापेक्ष नहीं, ज़मीन के सापेक्ष गोली की चाल = 540 + 30 = 570 km/h। चोर की गाड़ी (192 km/h) के सापेक्ष आघात की चाल = 570 − 192 = 378 km/h = 105 m/s — हानि के लिए यही सापेक्ष चाल प्रासंगिक है।
- 3.19 चित्र 3.22 के लिए उपयुक्त स्थितियाँ: (a) x–t: कोई व्यक्ति विराम से चलकर एक समान चाल से किसी स्थान तक जाता है, फिर लौटकर विराम में आ जाता है। (b) v–t: फर्श पर उछलती गेंद — वेग g की ढाल से घटता है, टक्कर पर अचानक पलटता है और प्रत्येक उछाल में आयाम घटता है। (c) a–t: बल्ले से टकराई गेंद — केवल टक्कर के क्षणिक अंतराल में बड़ा त्वरण, बाकी समय शून्य।
- 3.20 सरल आवर्ती गति के x–t ग्राफ़ (a = −ω²x) से चिह्न: t = 0.3 s पर x धनात्मक, v धनात्मक (उठ रहा है), a ऋणात्मक। t = 1.2 s पर x ऋणात्मक, v ऋणात्मक (गिर रहा है), a धनात्मक। t = −1.2 s पर x ऋणात्मक, v धनात्मक (ऊपर आ रहा है), a धनात्मक।
- 3.21 चित्र 3.24: तीन बराबर अंतरालों में औसत चाल अंतराल 2 में अधिकतम और अंतराल 1 में न्यूनतम है (अंतराल 2 में पथ सबसे लंबा है)। औसत वेग के चिह्न: अंतराल 1 धनात्मक, अंतराल 2 ऋणात्मक (अंतिम स्थिति प्रारंभिक से नीचे है), अंतराल 3 धनात्मक।
- 3.22 चित्र 3.25 (चाल–समय ग्राफ़): औसत त्वरण का परिमाण अंतराल 2 में अधिकतम और अंतराल 1 में न्यूनतम है; औसत चाल अंतराल 3 में अधिकतम और अंतराल 1 में न्यूनतम है। स्थिर दिशा को धनात्मक मानने पर v तीनों अंतरालों में धनात्मक है; औसत a भी तीनों में धनात्मक है (वक्र ऊपर उठ रहा है), जबकि अंतरालों के भीतर a का चिह्न चोटियों/घाटियों पर बदलता है। बिंदुओं A, B, C, D पर त्वरण: A पर धनात्मक (वक्र उठ रहा है), B, C, D पर शून्य (चरम बिंदु, ढाल शून्य)।
पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)
ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।
- 3.23 स्कूटर विराम से 1 m/s² से 10 s तक त्वरित होता है, फिर एकसमान वेग से चलता है। nवें सेकंड में तय दूरी त्वरित भाग में s_n = (n − 1) + 0.5 = n − 0.5 m है — n के साथ यह सरल रेखा है, परवलय नहीं (परवलय कुल दूरी–समय ग्राफ़ का होता है)। 10 s बाद वेग 10 m/s हो जाता है, इसलिए n > 10 के लिए s_n = 10 m नियत रहता है।
- 3.24 स्थिर लिफ्ट में गेंद 49 m/s से फेंकी गई: हाथों में लौटने में समय = 2×49/9.8 = 10 s। यदि लिफ्ट 5 m/s की एकसमान चाल से ऊपर चलने लगे, तब भी समय 10 s ही रहेगा, क्योंकि एकसमान वेग वाला निर्देश तंत्र जड़त्वीय है — सापेक्ष गति नहीं बदलती।
- 3.25 पट्टा 4 km/h से चल रहा है; बच्चा पट्टे के सापेक्ष 9 km/h से दौड़ता है; माता-पिता के बीच 50 m है। ज़मीन पर खड़े प्रेक्षक के लिए: (a) पट्टे की दिशा में बच्चे की चाल = 9 + 4 = 13 km/h, समय = 50 ÷ (13×1000/3600) ≈ 13.8 s। (b) विपरीत दिशा में चाल = 9 − 4 = 5 km/h, समय ≈ 36 s। (c) यदि माता/पिता (पट्टे के निर्देश तंत्र) से प्रेक्षण करें, तो दोनों दिशाओं में चाल 9 km/h और समय 20 s होगा।
- 3.26 200 m ऊँची चट्टान से 15 m/s और 30 m/s से ऊपर फेंके गए पत्थर (g = 10 m/s²): पहला पत्थर 8 s में ज़मीन पर आता है (200 + 15t − 5t² = 0 → t = 8 s), दूसरा 10 s में (t = 10 s)। इसलिए 0–8 s तक सापेक्ष स्थिति x₂ − x₁ = 15t (रेखीय, 8 s पर 120 m) और 8–10 s तक x₂ − x₁ = 200 + 30t − 5t² (परवलयी, 10 s पर 0) — यही चित्र 3.27 दिखाता है।
- 3.27 चित्र 3.28 (त्रिभुजीय चाल–समय ग्राफ़, शिखर 12 m/s, t = 5 s): (a) 0–10 s में दूरी = त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½×10×12 = 60 m; औसत चाल = 60/10 = 6 m/s। (b) 2–6 s में दूरी = 25.2 + 10.8 = 36 m; औसत चाल = 36/4 = 9 m/s।
- 3.28 चित्र 3.29 का v–t वक्र मुड़ा हुआ है, अर्थात् त्वरण एकसमान नहीं है। इसलिए सही सूत्र केवल (iii) v_average = [x(t₂) − x(t₁)]/(t₂ − t₁), (iv) a_average = [v(t₂) − v(t₁)]/(t₂ − t₁) और (vi) x(t₂) − x(t₁) = v–t वक्र के नीचे का क्षेत्रफल हैं। (i), (ii) और (v) गलत हैं, क्योंकि वे एकसमान त्वरण मानकर चलते हैं।
- x–t की ढाल = वेग, v–t की ढाल = त्वरण, v–t का क्षेत्रफल = विस्थापन — ग्राफ़ के यही तीन नियम हर प्रश्न की कुंजी हैं।
- औसत चाल = कुल पथ ÷ कुल समय; औसत वेग = विस्थापन ÷ समय — दोनों को कभी एक न समझें।
- एकसमान त्वरण के तीन समीकरण (v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as) केवल नियत त्वरण पर लागू होते हैं।
- आपेक्षिक वेग v_AB = v_A − v_B; एक ही दिशा में घटता है, विपरीत में जुड़ता है।
- तात्क्षणिक चाल हमेशा |तात्क्षणिक वेग| के बराबर होती है; वेग शून्य होने पर भी त्वरण अशून्य हो सकता है।

