Chapter 15: शरीर द्रव तथा परिसंचरण
रक्त, लसीका, हृदय, हृदय चक्र, ECG और दोहरा परिसंचरण।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
शरीर द्रव तथा परिसंचरण — EG के अपने नोट्स, सरल शब्दों में
Book: Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Biology) | Chapter 15 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
यह पृष्ठ Educational Galaxy के अपने मूल नोट्स हैं — किताब की नकल नहीं। यहाँ कोई आधिकारिक BSTBPC PDF नहीं दिया जाता है और यह पृष्ठ पाठ्यपुस्तक का विकल्प नहीं है।
रक्त और लसीका
रक्त तरल संयोजी ऊतक है — प्लाज़्मा (~55%) और संगठित पदार्थ (~45%)। प्लाज़्मा में जल, प्रोटीन (एल्बुमिन, ग्लोबुलिन, फाइब्रिनोजन), लवण, हार्मोन, पोषक पदार्थ और अपशिष्ट होते हैं। लाल रुधिर कणिकाएँ (RBC) हीमोग्लोबिन से O₂ ले जाती हैं; श्वेत कणिकाएँ (WBC) रक्षा करती हैं — न्यूट्रोफिल (भक्षण), लिम्फोसाइट (प्रतिरक्षा), मोनोसाइट, इओसिनोफिल (एलर्जी/परजीवी), बेसोफिल (हिस्टामीन); प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट) रक्त जमाव (स्कंदन) में सहायक हैं।
रक्त समूह ABO तंत्र से तय होते हैं — A में A प्रतिजन + b प्रतिरक्षी, B में B + a, AB में दोनों प्रतिजन (सर्व आदाता), O में कोई प्रतिजन नहीं (सर्व दाता)। Rh कारक भी महत्वपूर्ण है — Rh⁻ व्यक्ति को Rh⁺ रक्त देने पर प्रतिरक्षी बन सकते हैं। लसीका ऊतक द्रव से बनती है — इसमें RBC और प्लेटलेट नहीं होते; यह वसा (काइलोमाइक्रॉन) और प्रतिरक्षा कोशिकाएँ ले जाती है।
मानव हृदय और हृदय चक्र
मानव हृदय चार कोष्ठों वाला है — दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद, बायाँ निलय। दायाँ भाग अशुद्ध (ऑक्सीजन-रहित) रक्त और बायाँ भाग शुद्ध रक्त ले जाता है। अलिंद-निलय के बीच कपाट (त्रिवलनी दाईं ओर, द्विवलनी/माइट्रल बाईं ओर) और धमनियों के मुख पर अर्धचंद्र कपाट होते हैं — ये रक्त को उल्टा बहने से रोकते हैं। हृदय की धड़कन SA नोड (शिरा अलिंद पर्व, दाएँ अलिंद में) से शुरू होती है — इसे प्राकृतिक पेसमेकर कहते हैं; AV नोड, AV बंडल (हिस) और पुरकिंजे तंतु आवेग को निलयों तक पहुँचाते हैं।
हृदय चक्र में अलिंद और निलय बारी-बारी से सिकुड़ते (प्रकुंचन) और शिथिल (अनुशिथिलन) होते हैं। हृदय ध्वनियाँ: पहली 'लब' (कपाट बंद होने से) और दूसरी 'डब' (अर्धचंद्र कपाट बंद होने से)। हृदय निर्गम (cardiac output) = स्ट्रोक आयतन × हृदय दर ≈ 70 mL × 72/मिनट ≈ 5 लीटर/मिनट। ECG में P तरंग (अलिंद विध्रुवण), QRS सम्मिश्र (निलय विध्रुवण) और T तरंग (निलय पुनःध्रुवण) होती हैं — ECG हृदय रोगों के निदान में सहायक है।
दोहरा परिसंचरण और वाहिकाएँ
मनुष्य में दोहरा परिसंचरण होता है — फुफ्फुसीय (दायाँ निलय → फेफड़े → बायाँ अलिंद) और दैहिक (बायाँ निलय → शरीर → दायाँ अलिंद)। इससे शुद्ध और अशुद्ध रक्त नहीं मिलते, इसलिए ऊतकों को अधिक ऑक्सीजन मिलती है — गर्म रक्त वाले (समतापी) प्राणियों के लिए यह आवश्यक है। धमनियाँ रक्त को हृदय से दूर ले जाती हैं (फुफ्फुसीय धमनी अपवाद — अशुद्ध रक्त), शिराएँ हृदय की ओर लाती हैं (फुफ्फुसीय शिरा अपवाद — शुद्ध रक्त); केशिकाएँ सबसे पतली हैं, जहाँ विनिमय होता है।
परिसंचरण दो प्रकार का है — खुला (कीटों में, रक्त साइनसों में) और बंद (कशेरुकियों में, रक्त वाहिनियों में)। हृदय की क्रियाशीलता तंत्रिकीय (स्वायत्त तंत्रिका तंत्र) और हार्मोनल (एड्रेनलिन, थायरॉक्सिन) नियंत्रण से नियमित होती है — व्यायाम, भय या तनाव में हृदय दर बढ़ती है।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| रक्त समूह | प्रतिजन | प्रतिरक्षी |
|---|---|---|
| A | A | b |
| B | B | a |
| AB | A, B | कोई नहीं |
| O | कोई नहीं | a, b |

चित्र 1: चित्र 1 में रक्त परिसंचरण का चक्र दिखाया गया है।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): दोहरा परिसंचरण — सभी लेबल चित्र पर ही दिए गए हैं।
मुख्य शब्द / Key Terms
- प्लाज़्मा: रक्त का तरल भाग।
- हीमोग्लोबिन: ऑक्सीजन ले जाने वाला वर्णक।
- प्लेटलेट: थक्का बनाने वाली कोशिका।
- SA नोड: हृदय का पेसमेकर।
- दोहरा परिसंचरण: फुफ्फुसीय + दैहिक परिसंचरण।
- SA नोड: शिरा अलिंद पर्व — प्राकृतिक पेसमेकर।
- AV बंडल: हिस का बंडल, आवेग को निलयों तक ले जाता है।
- हृदय निर्गम: प्रति मिनट पंप किया गया रक्त (~5 लीटर)।
- QRS सम्मिश्र: ECG में निलय विध्रुवण।
- काइलोमाइक्रॉन: लसीका में वसा की बूँदें।
- सर्व दाता/आदाता: O — दाता; AB — आदाता।
याद रखें
- रक्त में प्लाज़्मा लगभग 55% होता है।
- मानव हृदय चार कोष्ठों वाला है।
- SA नोड पेसमेकर है।
- धमनी हृदय से दूर, शिरा हृदय की ओर।
- विनिमय केशिकाओं में होता है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: धमनी को हमेशा शुद्ध रक्त वाली समझ लेना। फुफ्फुसीय धमनी अशुद्ध रक्त ले जाती है — धमनी की पहचान दिशा से है, रक्त की शुद्धता से नहीं।
अभ्यास — Practice set (स्वयं करके देखें)
- रक्त के मुख्य घटक कौनसे हैं? संकेत: प्लाज़्मा, लाल कोशिकाएँ, श्वेत कोशिकाएँ, प्लेटलेट्स।
- मानव हृदय कितने कोष्ठों वाला है? संकेत: चार कोष्ठों वाला।
- SA नोड क्या है? संकेत: हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर।
- दोहरा परिसंचरण क्या है? संकेत: फुफ्फुसीय और दैहिक परिसंचरण का संयोजन।
- प्लेटलेट्स का कार्य क्या है? संकेत: रक्त का थक्का बनाना।
प्रश्न और उत्तर — Questions with Answers
- प्लाज़्मा प्रोटीन के कार्य बताइए। उत्तर: एल्बुमिन — परासरण दाब; ग्लोबुलिन — प्रतिरक्षा; फाइब्रिनोजन — रक्त जमाव; प्रोथ्रोम्बिन — स्कंदन श्रृंखला।
- WBC के पाँच प्रकार और एक-एक कार्य बताइए। उत्तर: न्यूट्रोफिल — भक्षण; लिम्फोसाइट — प्रतिरक्षा; मोनोसाइट — भक्षण; इओसिनोफिल — एलर्जी/परजीवी रक्षा; बेसोफिल — हिस्टामीन/हेपैरिन स्राव।
- रक्त को संयोजी ऊतक क्यों कहते हैं? उत्तर: क्योंकि इसमें आधात्री (प्लाज़्मा) और कोशिकाएँ होती हैं और यह शरीर के भागों को जोड़ने और परिवहन का कार्य करता है।
- लसीका और रुधिर में अंतर बताइए। उत्तर: लसीका में RBC/प्लेटलेट नहीं, प्रोटीन कम, वसा अधिक; रुधिर में RBC/प्लेटलेट सहित पूर्ण घटक और प्रोटीन अधिक।
- खुला और बंद परिसंचरण में अंतर बताइए। उत्तर: खुले में रक्त साइनसों में बहता है, दाब कम (कीट); बंद में रक्त वाहिनियों में बहता है, दाब अधिक, नियंत्रण बेहतर (कशेरुकी)।
- प्रकुंचन और अनुशिथिलन क्या हैं? उत्तर: प्रकुंचन — कोष्ठ का सिकुड़ना (रक्त पंप); अनुशिथिलन — कोष्ठ का शिथिल होना (रक्त भरना)।
- P तरंग तथा T तरंग क्या दर्शाती हैं? उत्तर: P — अलिंद विध्रुवण (अलिंद संकुचन); T — निलय पुनःध्रुवण (निलय शिथिलन की तैयारी)।
- हम अपने हृदय को पेशीजनक (मायोजेनिक) क्यों कहते हैं? उत्तर: क्योंकि धड़कन की शुरुआत हृदय की अपनी पेशी (SA नोड) से होती है, बाहरी तंत्रिका से नहीं — तंत्रिका/हार्मोन केवल दर नियंत्रित करते हैं।
बोर्ड परीक्षा प्रश्न — Board-pattern अभ्यास प्रश्न
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- फुफ्फुसीय धमनी अशुद्ध रक्त क्यों ले जाती है? उत्तर: क्योंकि वह हृदय से फेफड़ों की ओर जाती है; धमनी की पहचान दिशा से है।
- हृदय चक्र में पहले कौन सिकुड़ता है? उत्तर: अलिंद, फिर निलय।
- केशिकाएँ विनिमय के लिए उपयुक्त क्यों हैं? उत्तर: क्योंकि उनकी दीवार एक कोशिका मोटी होती है।
- श्वेत रक्त कोशिकाओं का कार्य क्या है? उत्तर: रोगों से लड़ना।
- रक्त का pH लगभग कितना होता है? उत्तर: लगभग 7.4।
पुस्तक की प्रश्नावली से — Extension Q&A
नीचे के प्रश्न पुस्तक की प्रश्नावली (अभ्यास) के प्रश्न हैं, EG के अपने शब्दों में पूछे गए हैं और उनके उत्तर भी EG के अपने शब्दों में दिए गए हैं — किताब का हूबहू पाठ नहीं छापा गया है।
- अभ्यास 1: रक्त के संगठित पदार्थों के अवयवों का वर्णन करें तथा प्रत्येक अवयव के एक प्रमुख कार्य के बारे में लिखें। उत्तर: RBC — O₂/CO₂ परिवहन (हीमोग्लोबिन); WBC — रक्षा (भक्षण, प्रतिरक्षा); प्लेटलेट्स — रक्त जमाव।
- अभ्यास 2: प्लाज्मा (प्लैज़्मा) प्रोटीन का क्या महत्व है? उत्तर: एल्बुमिन — परासरण दाब और pH; ग्लोबुलिन — प्रतिरक्षा; फाइब्रिनोजन/प्रोथ्रोम्बिन — स्कंदन; परिवहन प्रोटीन — हार्मोन/लिपिड वहन।
- अभ्यास 3: स्तंभ I का स्तंभ II से मिलान करें — (i) इयोसिनोफिल्स (ii) लाल रुधिर कणिकाएं (iii) AB रक्त समूह (iv) पट्टिकाणु (v) प्रकुंचन। उत्तर: (i) — (ग) संक्रमण प्रतिरोधन; (ii) — (च) गैस परिवहन (अभिगमन); (iii) — (ख) सर्व आदाता; (iv) — (क) रक्त जमाव (स्कंदन); (v) — (घ) हृदय संकुचन।
- अभ्यास 4: रक्त को एक संयोजी ऊतक क्यों मानते हैं? उत्तर: क्योंकि इसमें आधात्री (प्लाज़्मा) और कोशिकाएँ होती हैं, यह शरीर के भागों को जोड़ता है और परिवहन, रक्षा, नियमन करता है — संयोजी ऊतक के सभी लक्षण।
- अभ्यास 5: लसीका एवं रुधिर में अंतर बताएं। उत्तर: लसीका — रंगहीन, RBC/प्लेटलेट रहित, प्रोटीन कम, वसा (काइलोमाइक्रॉन) सहित, धीमा प्रवाह; रुधिर — लाल, सभी कोशिकाएँ, प्रोटीन अधिक, तेज़ प्रवाह।
- अभ्यास 6: दोहरे परिसंचरण से क्या तात्पर्य है? इसकी क्या महत्ता है? उत्तर: रक्त का हृदय से दो बार गुजरना — फुफ्फुसीय और दैहिक पथ; महत्ता: शुद्ध-अशुद्ध रक्त नहीं मिलते, ऊतकों को अधिक O₂ मिलती है, समतापी प्राणियों की उच्च चयापचय दर संभव होती है।
- अभ्यास 7: भेद स्पष्ट करें — (क) रक्त एवं लसीका (ख) खुला व बंद परिसंचरण तंत्र (ग) प्रकुंचन तथा अनुशिथिलन (घ) P तरंग तथा T तरंग। उत्तर: (क) ऊपर बताया गया; (ख) खुला — साइनस, कम दाब; बंद — वाहिनी, अधिक दाब; (ग) प्रकुंचन — सिकुड़ना; अनुशिथिलन — शिथिल होना; (घ) P — अलिंद विध्रुवण; T — निलय पुनःध्रुवण।
- अभ्यास 8: कशेरुकी के हृदयों में विकासीय परिवर्तनों का वर्णन करें। उत्तर: मत्स्य — 2 कोष्ठ (1 अलिंद + 1 निलय), एकल परिसंचरण; उभयचर — 3 कोष्ठ; सरीसृप — 3 कोष्ठ (मगरमच्छ में 4); पक्षी/स्तनधारी — 4 कोष्ठ, पूर्ण दोहरा परिसंचरण।
- अभ्यास 9: हम अपने हृदय को पेशीजनक (मायोजेनिक) क्यों कहते हैं? उत्तर: क्योंकि आवेग की उत्पत्ति हृदय की अपनी पेशी (SA नोड) में होती है; तंत्रिका तंत्र केवल दर को बढ़ाता/घटाता है, धड़कन शुरू नहीं करता।
- अभ्यास 10: शिरा अलिंद पर्व (कोटरालिंद गाँठ SAN) को हृदय का गति प्रेरक (पेसमेकर) क्यों कहा जाता है? उत्तर: क्योंकि SA नोड सबसे तेज़ दर से आवेग बनाता है (70-75/मिनट) और यही आवेग पूरे हृदय की लय तय करता है।
- अभ्यास 11: अलिंद निलय गाँठ (AVN) तथा अलिंद निलय बंडल (AVB) का हृदय के कार्य में क्या महत्व है? उत्तर: AV नोड आवेग को थोड़ा विलंबित करता है (अलिंद पहले सिकुड़ें), फिर AV बंडल और पुरकिंजे तंतु आवेग को निलयों में तेज़ी से फैलाते हैं, जिससे दोनों निलय एक साथ सिकुड़ते हैं।
- अभ्यास 12: हृद चक्र तथा हृदनिकास को परिभाषित करें। उत्तर: हृद चक्र — एक धड़कन का पूरा क्रम (अलिंद + निलय प्रकुंचन/अनुशिथिलन, ~0.8 सेकंड); हृदनिकास — प्रति मिनट पंप रक्त (स्ट्रोक आयतन × दर ≈ 5 लीटर/मिनट)।
- अभ्यास 13: हृदय ध्वनियों की व्याख्या करें। उत्तर: पहली ध्वनि 'लब' — अलिंद-निलय कपाट बंद होने से (निलय प्रकुंचन की शुरुआत); दूसरी 'डब' — अर्धचंद्र कपाट बंद होने से (निलय प्रकुंचन का अंत)।
- अभ्यास 14: एक मानक ईसीजी को दर्शाएं तथा उसके विभिन्न खंडों का वर्णन करें। उत्तर: चित्र-आधारित प्रश्न — P तरंग (अलिंद विध्रुवण), QRS सम्मिश्र (निलय विध्रुवण), T तरंग (निलय पुनःध्रुवण); PR अंतराल और ST खंड भी दिखाएँ।
इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें: पहले सार पढ़ें, फिर तालिका और चित्र देखें, उसके बाद Practice set स्वयं करें और अंत में Extension Q&A से अपनी तैयारी जाँचें।
- रक्त में प्लाज़्मा लगभग 55% होता है।
- मानव हृदय चार कोष्ठों वाला है।
- SA नोड पेसमेकर है।
- धमनी हृदय से दूर, शिरा हृदय की ओर।
- विनिमय केशिकाओं में होता है।
- रक्त: प्लाज़्मा 55%, कोशिकाएँ 45%।
- SA नोड = पेसमेकर; हृदय निर्गम ~5 लीटर/मिनट।
- दोहरा परिसंचरण: फुफ्फुसीय + दैहिक।
Is chapter me body fluids aur circulation samjha — blood, lymph, heart, cardiac cycle aur ECG. Yaad rakho: SA node heart ka natural pacemaker hai aur cardiac output lagbhag 5 litre per minute hota hai.

