Educational Galaxy shield logo

Educational Galaxy

LEARN • THINK • SPEAK • GROW

Class 11 • Physics • Bhautiki Bhag-2

Chapter 12: अणुगति सिद्धांत

आदर्श गैस समीकरण, ऊर्जा समविभाजन, माध्य मुक्त पथ और ग्राहम का नियम — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print: browser से PDF save कर सकते हैं। यह कोई textbook PDF नहीं है।

अणुगति सिद्धांत — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics)  |  Chapter 12  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

आदर्श गैस का व्यवहार

अणुगति सिद्धांत के अनुसार गैस छोटे-छोटे कणों से बनी है जो लगातार यादृच्छिक गति करते हैं। आदर्श गैस समीकरण PV = nRT है, जहाँ P दाब, V आयतन, n मोलों की संख्या और T केल्विन ताप है।

दाब गैस कणों के दीवार से टकराने से पैदा होता है। ताप बढ़ने पर कणों की औसत गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

गतिज ऊर्जा और स्वतंत्रता की कोटियाँ

एक परमाणुक गैस के एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा (3/2)kT होती है। ऊर्जा के समविभाजन के नियम के अनुसार हर स्वतंत्रता कोटि को (1/2)kT ऊर्जा मिलती है।

एक परमाणुक गैस की 3, द्विपरमाणुक की 5 (कमरे के ताप पर) स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं। इन्हीं से गैस की विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात γ तय होता है।

माध्य मुक्त पथ और वास्तविक गैसें

दो लगातार टक्करों के बीच अणु द्वारा तय की गई औसत दूरी माध्य मुक्त पथ कहलाती है। दाब बढ़ने पर यह घटता है।

वास्तविक गैसें कम ताप और अधिक दाब पर आदर्श व्यवहार से विचलित होती हैं, क्योंकि तब अणुओं का अपना आयतन और उनके बीच आकर्षण महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

इस अध्याय का विचार: गैस का दाब और ताप उसके अणुओं की गति का ही परिणाम हैं — दाब दीवारों पर अणुओं की टक्करों से, ताप उनकी औसत गतिज ऊर्जा से आता है। इन्हीं सूक्ष्म नियमों से बॉयल-चार्ल्स नियम, ऊर्जा समविभाजन और विसरण के नियम निकलते हैं।

पुस्तक की संरचना: अध्याय अणुगति सिद्धांत की परिकल्पनाओं से शुरू होकर दाब का अणुगतिक व्यंजक, ऊर्जा समविभाजन, माध्य मुक्त पथ, ब्राउनी गति और वास्तविक गैसों के विचलन तक जाता है।

13.1–13.2 आदर्श गैस और अणुगति सिद्धांत की परिकल्पनाएँ

आदर्श गैस की परिकल्पनाएँ: अणु बिंदुवत्, प्रत्यास्थ टक्करें, अंतराणविक बल नगण्य, यादृच्छिक गति। इन्हीं से pV = nRT निकलता है। STP (1 atm, 0 °C) पर 1 मोल आदर्श गैस का आयतन = RT/p = 22.4 लीटर — यह सभी गैसों के लिए समान है (ऐवोगाद्रो नियम)।

13.3–13.4 दाब और ताप का अणुगतिक अर्थ

दाब p = (1/3)·n·m·<v²> — दीवारों पर अणुओं के संवेग-परिवर्तन की दर। औसत स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा = (3/2)kT — ताप केवल इसी से जुड़ा है, अणु के द्रव्यमान से नहीं। वर्ग-माध्य-मूल चाल v_rms = √(3kT/m) — हल्के अणु तेज़, भारी धीमे।

13.5–13.6 ऊर्जा समविभाजन नियम

तापीय साम्य में कुल ऊर्जा सभी स्वतंत्रता कोटियों में समान रूप से बँट जाती है — प्रत्येक द्विघाती कोटि को (1/2)kT ऊर्जा मिलती है। एकपरमाणुक गैस: 3 स्थानांतरीय कोटियाँ → C_V = (3/2)R; द्विपरमाणुक: 3 स्थानांतरीय + 2 घूर्णन → C_V = (5/2)R; प्रत्येक कंपन विधा में 2 कोटियाँ (गतिज + स्थितिज) होती हैं।

13.7–13.8 माध्य मुक्त पथ और ब्राउनी गति

माध्य मुक्त पथ λ = 1/(√2·πd²n) — दो क्रमिक संघट्टों के बीच अणु द्वारा चली औसत दूरी; गैस में यह अंतराणविक दूरी का लगभग 100 गुना और अणु के आमाप का लगभग 1000 गुना होता है। संघट्ट-काल (d/v) दो संघट्टों के बीच के मुक्त समय की तुलना में नगण्य होता है — इसीलिए गैस के अणु अधिकांश समय स्वतंत्र गति करते हैं।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

गैसγ का मान
एक परमाणुक5/3
द्विपरमाणुक7/5
बहुपरमाणुकलगभग 4/3

अणुगति सिद्धांत — गैस के कण

चित्र 1: चित्र 1 में स्थिर ताप पर दाब-आयतन वक्र दिखाया गया है।

अणुगति सिद्धांत — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

अणुगति सिद्धांत: गैस के अणुओं की यादृच्छिक गति

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): अणुगति सिद्धांत: गैस के अणुओं की यादृच्छिक गति

मुख्य शब्द / Key Terms

  • आदर्श गैस: PV = nRT का पालन करने वाली गैस।
  • बोल्ट्ज़मान नियतांक k: प्रति अणु ऊर्जा-ताप संबंध का नियतांक।
  • स्वतंत्रता कोटि: ऊर्जा संचित करने का स्वतंत्र तरीका।
  • माध्य मुक्त पथ: दो टक्करों के बीच औसत दूरी।
  • समविभाजन: हर कोटि को (1/2)kT ऊर्जा।
  • आदर्श गैस समीकरण: pV = nRT; STP पर मोलर आयतन 22.4 L।
  • दाब का अर्थ: p = (1/3)nm<v²>; औसत गतिज ऊर्जा = (3/2)kT।
  • v_rms: √(3kT/m) — ताप और अणु-द्रव्यमान पर निर्भर; <v²> ≠ (<v>)²।
  • समविभाजन: प्रत्येक द्विघाती कोटि को (1/2)kT; C_V = (f/2)R।
  • माध्य मुक्त पथ: λ = 1/(√2πd²n); ग्राहम का नियम: विसरण दर ∝ 1/√M।

याद रखें

  • PV = nRT हर गैस-प्रश्न का आधार है।
  • ताप केल्विन में ही लें, सेल्सियस में नहीं।
  • औसत गतिज ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है।
  • γ = Cp/Cv होता है।
  • वास्तविक गैसें उच्च दाब पर विचलित होती हैं।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: गैस समीकरण में ताप सेल्सियस में रख देना। PV = nRT में T हमेशा केल्विन में होता है।

जानकारी — <v²> और (<v>)² अलग हैं

किसी राशि के वर्ग का माध्य, उस राशि के माध्य के वर्ग के बराबर आवश्यक नहीं है। गैस के अणुओं की चालों में फैलाव होता है, इसलिए v_rms (√<v²>) औसत चाल <v> से अधिक होती है — यही मैक्सवेल वितरण का आधार है।

चेतावनी — कम दाब, उच्च ताप पर ही आदर्श व्यवहार

वास्तविक गैसें केवल कम दाब और उच्च ताप पर आदर्श गैस समीकरण का पालन करती हैं। PV/T बनाम P ग्राफ़ में आदर्श गैस को बिंदुकित क्षैतिज रेखा दर्शाती है; वास्तविक गैस के वक्र उससे विचलित होते हैं, पर P → 0 पर सभी वक्र उसी बिंदु पर मिलते हैं (PV/T = nR)।

टिप — विसरण से गैस की पहचान

ग्राहम के नियम से दो गैसों की विसरण दरों का अनुपात उनके मोलर द्रव्यमानों के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है — दरों को मापकर अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान निकाला जा सकता है (प्रश्न 13.12: ऑक्सीजन)।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. आदर्श गैस समीकरण लिखिए। संकेत: PV = nRT।
  2. औसत गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है? संकेत: एक परमाणुक अणु के लिए (3/2)kT।
  3. माध्य मुक्त पथ किसे कहते हैं? संकेत: दो टक्करों के बीच औसत दूरी को।
  4. γ क्या है? संकेत: Cp और Cv का अनुपात।
  5. गैस का दाब कैसे पैदा होता है? संकेत: कणों के दीवार से टकराने से।

मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A

  1. सभी गैसों का STP पर मोलर आयतन समान क्यों होता है? उत्तर: ऐवोगाद्रो नियम — समान ताप-दाब पर समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है, गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती।
  2. भारी अणु धीमे क्यों चलते हैं? उत्तर: क्योंकि औसत गतिज ऊर्जा (3/2)kT सभी के लिए समान है — v_rms = √(3kT/m), द्रव्यमान अधिक तो चाल कम।
  3. कमरे में वायु के अणु गुरुत्व से नीचे क्यों नहीं गिर जाते? उत्तर: क्योंकि वे बहुत तेज़ गति करते हैं और निरंतर टक्करें करते हैं; साम्य में घनत्व ऊँचाई के साथ केवल थोड़ा घटता है (स्थितिज ऊर्जा mgh औसत गतिज ऊर्जा से बहुत कम है)।
  4. माध्य मुक्त पथ अंतराणविक दूरी से इतना बड़ा क्यों है? उत्तर: क्योंकि अणु का आमाप अंतराणविक दूरी से बहुत छोटा है — टक्कर के लिए दो अणुओं का आमने-सामने आना आवश्यक है, जो विरले ही होता है।
  5. विसरण दर से गैस की पहचान कैसे होती है? उत्तर: ग्राहम के नियम से — दर ∝ 1/√M; हाइड्रोजन की तुलना में 4 गुना धीमी विसरण वाली गैस का मोलर द्रव्यमान 16 गुना होगा।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. ताप दोगुना हो तो औसत गतिज ऊर्जा कितनी होगी? उत्तर: दोगुनी, क्योंकि वह ताप के समानुपाती है।
  2. द्विपरमाणुक गैस की स्वतंत्रता कोटियाँ कितनी हैं? उत्तर: कमरे के ताप पर 5।
  3. वास्तविक गैस आदर्श से कब विचलित होती है? उत्तर: कम ताप और अधिक दाब पर।
  4. दाब बढ़ने पर माध्य मुक्त पथ पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उत्तर: वह घट जाएगा।
  5. एक परमाणुक गैस के लिए γ कितना होता है? उत्तर: 5/3।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।

  1. 13.1 ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर उनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात: अणु का व्यास 3 Å लेकर, एक अणु का आयतन = (4/3)π×(1.5×10⁻¹⁰)³ ≈ 1.41×10⁻²⁹ m³; एक मोल में कुल आणविक आयतन = 6.02×10²³ × 1.41×10⁻²⁹ ≈ 8.5×10⁻⁶ m³; STP पर मोलर आयतन 22.4×10⁻³ m³ — अतः अनुपात ≈ 3.8×10⁻⁴ (लगभग 4×10⁻⁴) — अणु स्वयं गैस के आयतन का बहुत छोटा भाग घेरते हैं, इसीलिए आदर्श गैस की परिकल्पना (बिंदुवत् अणु) उचित है।
  2. 13.2 मोलर आयतन, STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है (STP: 1 atm दाब, 0 °C): V = RT/p = 8.31×273.15/1.013×10⁵ = 0.0224 m³ = 22.4 लीटर — यही सभी आदर्श गैसों के लिए समान है।
  3. 13.3 चित्र 13.8 में ऑक्सीजन के 1.00×10⁻³ kg द्रव्यमान के लिए PV/T बनाम P ग्राफ़ दो अलग-अलग तापों पर दर्शाए गए हैं: (a) बिंदुकित रेखा आदर्श गैस के व्यवहार को दर्शाती है (PV/T = नियत = nR)। (b) T₁ > T₂ है — उच्च ताप पर गैस आदर्श व्यवहार के अधिक निकट रहती है (T₁ का वक्र बिंदुकित रेखा के अधिक निकट है)। (c) y-अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं, वहाँ PV/T = nR = (1.00×10⁻³/32×10⁻³)×8.31 ≈ 0.26 J/K है। (d) हाइड्रोजन के लिए भी उसी बिंदु पर PV/T का मान यही होगा, बशर्ते मोलों की संख्या समान हो — अतः हाइड्रोजन का आवश्यक द्रव्यमान = 0.03125 mol × 2.02×10⁻³ kg/mol ≈ 6.3×10⁻⁵ kg होगा।
  4. 13.4 ऑक्सीजन सिलिंडर (आयतन 30 लीटर) में ऑक्सीजन का आरंभिक दाब 15 atm और ताप 27 °C है; कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी दाब गिरकर 11 atm और ताप गिरकर 17 °C हो जाता है: आरंभिक मोल = 15×1.013×10⁵×0.030/(8.31×300) ≈ 18.29 mol; अंतिम मोल = 11×1.013×10⁵×0.030/(8.31×290) ≈ 13.87 mol; निकाली गई ऑक्सीजन = 4.42 mol × 32 g/mol ≈ 141 g (0.14 kg)।
  5. 13.5 वायु का बुलबुला (आयतन 1.0 cm³) 40 m गहरी झील की तली से (ताप 12 °C) उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है (ताप 35 °C): तली पर दाब = 1.013×10⁵ + 1000×9.8×40 ≈ 4.93×10⁵ Pa; पृष्ठ पर 1.013×10⁵ Pa; संयुक्त गैस नियम से V₂ = 1.0×(4.93/1.013)×(308/285) ≈ 5.3 cm³।
  6. 13.6 कमरे (धारिता 25.0 m³) में 27 °C ताप और 1 atm दाब पर वायु के कुल अणुओं की संख्या: मोल = 1.013×10⁵×25/(8.31×300) ≈ 1016 mol; अणुओं की संख्या = 1016×6.02×10²³ ≈ 6.1×10²⁶ (नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जलवाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं)।
  7. 13.7 हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा = (3/2)kT: (i) कमरे के ताप (27 °C = 300 K) पर = 1.5×1.38×10⁻²³×300 ≈ 6.2×10⁻²¹ J; (ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000 K) पर ≈ 1.24×10⁻¹⁹ J; (iii) 100 लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर ≈ 2.07×10⁻¹⁵ J।
  8. 13.8 समान धारिता के तीन बर्तनों में एक ही ताप और दाब पर गैसें भरी हैं — पहले में नियॉन (एकपरमाणुक), दूसरे में क्लोरीन (द्विपरमाणुक), तीसरे में यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (बहुपरमाणुक): तीनों बर्तनों में गैसों के संगत अणुओं की संख्या समान है (ऐवोगाद्रो नियम: pV = NkT)। पर अणुओं की वर्ग-माध्य-मूल चालें समान नहीं हैं — v_rms = √(3kT/m) अणु-द्रव्यमान पर निर्भर करती है: नियॉन सबसे तेज़, क्लोरीन मध्यम, UF₆ सबसे धीमा।
  9. 13.9 आर्गन गैस सिलिंडर में अणुओं की v_rms, −20 °C पर हीलियम गैस परमाणुओं की v_rms के बराबर हो, इसके लिए: v_rms ∝ √(T/M) से T_Ar = 253×(39.9/4.0) ≈ 2524 K (लगभग 2250 °C) ताप आवश्यक होगा।
  10. 13.10 नाइट्रोजन गैस के सिलिंडर में 2.0 atm दाब एवं 17 °C ताप पर: अणु संख्या घनत्व n = p/(kT) ≈ 5.06×10²⁵ m⁻³; नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या लगभग 1.0 Å (व्यास 2.0 Å) लेकर माध्य मुक्त पथ λ = 1/(√2·πd²n) ≈ 1.1×10⁻⁷ m; संघट्ट आवृत्ति = v_rms/λ ≈ 508/1.1×10⁻⁷ ≈ 4.6×10⁹ s⁻¹। संघट्ट-काल (लगभग d/v ≈ 4×10⁻¹³ s) की तुलना अणुओं द्वारा दो संघट्टों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक चलने में लगे समय (1/आवृत्ति ≈ 2.2×10⁻¹⁰ s) से करने पर: संघट्ट-काल मुक्त समय का लगभग 1/500 है — अणु अधिकांश समय स्वतंत्र गति करते हैं।

पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)

ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।

  1. 13.11 1 मीटर लंबी संकीर्ण (और एक सिरे पर बंद) नली क्षैतिज रखी गई है; इसमें 76 cm लंबाई भरा पारद सूत्रक, वायु के 15 cm स्तंभ को नली में रोककर रखता है: खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए नली को ऊर्ध्व कर देने पर पारद बाहर बहने लगेगा — संतुलन के लिए बॉयल नियम (p·L = 76×15) और द्रवस्थैतिक संतुलन (p = 76 − h, L + h = 100) को एक साथ हल करने पर h² − 176h + 6460 = 0 → h ≈ 52 cm — अर्थात् लगभग 24 cm पारा बाहर बह जाएगा, लगभग 52 cm पारा रह जाएगा और वायु स्तंभ लगभग 48 cm लंबा हो जाएगा।
  2. 13.12 किसी उपकरण से हाइड्रोजन गैस 28.7 cm³/s की दर से विसरित हो रही है; उन्हीं स्थितियों में कोई दूसरी गैस 7.2 cm³/s की दर से विसरित होती है: ग्राहम के विसरण नियम (R₁/R₂ = √(M₂/M₁)) से M₂ = 2.02×(28.7/7.2)² ≈ 32.1 — अतः दूसरी गैस ऑक्सीजन (O₂) है।
  3. 13.13 साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब अपने संपूर्ण आयतन में एकसमान हैं — यह पूर्णतः सत्य केवल तभी है जब कोई भी बाह्य प्रभाव न हो; गुरुत्व से प्रभावित गैस स्तंभ का घनत्व ऊँचाई के साथ घटता है: ‘वातावरण के नियम’ n₂ = n₁·exp[−mg(h₂−h₁)/(kT)] का उपयोग द्रव स्तंभ में निलंबित कण के अवसादन साम्य के लिए करने पर: कण का आभासी भार = (ρ−ρ′)·V·g (आर्किमिडीज़ सिद्धांत से उत्प्लावन घटाकर) — अतः n₂ = n₁·exp[−(ρ−ρ′)·V·g·N_A·(h₂−h₁)/(RT)] प्राप्त होता है, जहाँ ρ निलंबित कण का घनत्व और ρ′ चारों तरफ के माध्यम का घनत्व है।
  4. 13.14 ठोसों व द्रवों के घनत्वों से उनके परमाणुओं की आमापों का आकलन (लगभग): एक परमाणु का आयतन ≈ M/(ρ·N_A); आमाप ≈ (आयतन)^(1/3) — उदाहरण: लोहे के लिए M = 55.8 g/mol, ρ = 7.87 g/cm³ से परमाण्विक आयतन ≈ 1.18×10⁻²³ cm³, आमाप ≈ 2.3 Å; जल के अणु के लिए ≈ 3 Å; सोने के लिए ≈ 2.6 Å — अर्थात् परमाण्विक आमाप कुछ ऐंग्स्ट्रॉम (10⁻¹⁰ m की कोटि) के होते हैं। भिन्न परमाण्विक आकारों के लिए प्राप्त वास्तविक संख्याओं का बिल्कुल अक्षरशः प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि दृढ़ संवेष्टन सन्निकटन के परमाण्वीय आकार कुछ Å के परास में हैं।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • आदर्श गैस: pV = nRT; STP पर मोलर आयतन 22.4 L; दाब = अणुओं की दीवारों पर टक्करों का परिणाम।
  • ताप = औसत स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा का माप: (3/2)kT; v_rms = √(3kT/m)।
  • समविभाजन: प्रत्येक द्विघाती कोटि को (1/2)kT; द्विपरमाणुक C_V = (5/2)R।
  • माध्य मुक्त पथ λ = 1/(√2πd²n); संघट्ट-काल मुक्त समय की तुलना में नगण्य है।
  • ग्राहम का नियम: विसरण दर ∝ 1/√M — दरों से अज्ञात गैस की पहचान संभव है।
← Chapter 11: ऊष्मागतिकीChapter 13: दोलन →