Chapter 10: द्रव्य के तापीय गुण
तापमान के पैमाने, ऊष्मीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, प्रावस्था आरेख और न्यूटन का शीतलन नियम — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
द्रव्य के तापीय गुण — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Bhautiki Bhag-2 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics) | Chapter 10 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
ताप और ऊष्मा
ताप किसी वस्तु की गर्माहट का माप है और ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापांतर के कारण बहती है। सेल्सियस, फ़ारेनहाइट और केल्विन तीनों पैमानों में संबंध T(K) = T(°C) + 273.15 है।
विशिष्ट ऊष्मा धारिता किसी पदार्थ के 1 kg का ताप 1 K बढ़ाने के लिए ज़रूरी ऊष्मा है। पानी की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होने से वह धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है।
तापीय प्रसार
गर्म करने पर ठोस, द्रव और गैस फैलते हैं। रेल की पटरियों के बीच अंतराल और पुलों में प्रसार जोड़ इसी प्रसार के कारण छोड़े जाते हैं।
पानी 0°C से 4°C तक गर्म करने पर सिकुड़ता है — इसे पानी का असंगत प्रसार कहते हैं। इसी से सर्दियों में झील की सतह जमने पर भी नीचे का पानी 4°C पर रहता है।
ऊष्मा का स्थानांतरण
ऊष्मा तीन तरीकों से बहती है — चालन (ठोसों में), संवहन (तरलों में धाराओं से) और विकिरण (बिना माध्यम के, जैसे सूर्य की गर्मी)।
अवस्था बदलते समय ताप स्थिर रहता है; उस समय दी गई ऊष्मा गुप्त ऊष्मा कहलाती है। कैलोरीमिति में दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा का सिद्धांत लागू होता है।
इस अध्याय का विचार: तापमान किसी वस्तु की ‘गर्माहट’ का माप है, ऊष्मा ऊर्जा के स्थानांतरण का नाम है। गर्म करने पर पदार्थ फैलता है, प्रावस्था बदलता है, और ऊष्मा चालन, संवहन और विकिरण से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है — इन्हीं नियमों से थर्मामीटर, इंजन और घरों का तापन समझा जाता है।
पुस्तक की संरचना: अध्याय तापमान के पैमानों और केल्विन पैमाने से शुरू होकर ऊष्मीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा, प्रावस्था परिवर्तन, ऊष्मा स्थानांतरण (चालन/संवहन/विकिरण) और न्यूटन के शीतलन नियम तक जाता है।
11.1–11.2 तापमान और केल्विन पैमाना
केल्विन पैमाना परम ताप पैमाना है — इसका शून्य परम शून्य है। जल का त्रिक बिंदु (273.16 K) इसका एकमात्र नियत बिंदु है; सेल्सियस शून्य त्रिक बिंदु से 0.01 K नीचे है, इसलिए t_C = T − 273.15। दो परम पैमानों A और B में त्रिक बिंदु 200 A और 350 B हो, तो T_A/T_B = 200/350 = 4/7 होगा।
11.3–11.5 ऊष्मीय प्रसार
रैखिक प्रसार ΔL = αLΔT; क्षेत्रीय ≈ 2α, आयतन ≈ 3α (छोटे प्रसारों के लिए)। छिद्र भी पदार्थ की तरह ही फैलता है — गर्म करने पर छिद्र का व्यास बढ़ता है, घटता नहीं। दो छड़ों को जोड़कर गर्म करने पर, यदि सिरे स्वतंत्र हों तो कोई तापीय प्रतिबल नहीं होता; यदि सिरे जकड़े हों तो प्रतिबल = Y·α·ΔT उत्पन्न होता है।
11.6–11.7 विशिष्ट ऊष्मा और ऊष्मामिति
विशिष्ट ऊष्मा धारिता s: 1 kg पदार्थ का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा। ऊष्मामिति का सिद्धांत: दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा (क्षय नगण्य मानकर)। द्विपरमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा एकपरमाणुक गैसों से अधिक होती है, क्योंकि उनमें घूर्णन की स्वतंत्रता कोटियाँ भी होती हैं (5 बनाम 3)।
11.8–11.9 प्रावस्था परिवर्तन और प्रावस्था आरेख
प्रावस्था परिवर्तन नियत ताप पर होता है — दी गई ऊष्मा गुप्त ऊष्मा बन जाती है। CO₂ का त्रिक बिंदु −56.6 °C, 5.11 atm है; क्रांतिक बिंदु 31.1 °C, 73 atm है — क्रांतिक ताप से ऊपर CO₂ को केवल दाब से द्रवित नहीं किया जा सकता। त्रिक दाब से कम दाब पर ठंडा करने से वाष्प सीधे ठोस बनती है (द्रव प्रावस्था नहीं आती)।
11.10–11.11 ऊष्मा स्थानांतरण और शीतलन नियम
चालन: Q/t = kAΔT/d — धातुएँ अच्छी चालक, लकड़ी/वायु कुचालक। संवहन: तरल के भागों की गति से ऊष्मा स्थानांतरण। विकिरण: बिना माध्यम के, प्रकाश की चाल से — किरचॉफ़ नियम: अच्छा अवशोषक ही अच्छा उत्सर्जक होता है। न्यूटन का शीतलन नियम: शीतलन की दर ∝ (वस्तु का ताप − परिवेश का ताप), जब अंतर छोटा हो।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| विधि | माध्यम |
|---|---|
| चालन | ठोस, कणों से कण तक |
| संवहन | तरल, धाराओं से |
| विकिरण | बिना माध्यम, तरंगों से |

चित्र 1: चित्र 1 में ऊष्मा स्थानांतरण की विधियाँ क्रम से दिखाई गई हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): ऊष्मा चालन: Q/t = kAΔT/d
मुख्य शब्द / Key Terms
- ताप: गर्माहट का माप।
- ऊष्मा: तापांतर से बहने वाली ऊर्जा।
- विशिष्ट ऊष्मा: 1 kg का ताप 1 K बढ़ाने की ऊष्मा।
- गुप्त ऊष्मा: अवस्था बदलने की ऊष्मा, बिना ताप बदले।
- तापीय प्रसार: गर्म करने पर आकार बढ़ना।
- केल्विन पैमाना: T(K) = t_C + 273.15; त्रिक बिंदु 273.16 K ही एकमात्र नियत बिंदु है।
- ऊष्मीय प्रसार: ΔL = αLΔT; छिद्र भी पदार्थ की तरह फैलता है; जकड़ी छड़ में प्रतिबल = YαΔT।
- विशिष्ट ऊष्मा: एकपरमाणुक गैस C_V ≈ 3 cal/mol·K; द्विपरमाणुक ≈ 5 cal/mol·K (घूर्णन कोटियों के कारण)।
- CO₂ आरेख: त्रिक बिंदु −56.6 °C/5.11 atm; क्रांतिक बिंदु 31.1 °C/73 atm।
- शीतलन नियम: शीतलन की दर ∝ ताप-अंतर (छोटे अंतरों के लिए); वाष्पन की गुप्त ऊष्मा शीतलन का शक्तिशाली साधन है।
याद रखें
- केल्विन में बदलने के लिए 273.15 जोड़ें।
- पानी का असंगत प्रसार 0–4°C में होता है।
- अवस्था बदलते समय ताप नहीं बदलता।
- चालन में कण अपनी जगह नहीं छोड़ते।
- कैलोरीमिति में ऊष्मा का संतुलन लागू होता है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: ताप और ऊष्मा को एक समझ लेना। ताप एक स्थिति है, ऊष्मा ऊर्जा का प्रवाह है — दो वस्तुओं का ताप समान भी हो, तो उनकी ऊष्मा अलग हो सकती है।
बर्फ का गलनांक और जल का क्वथनांक दाब पर निर्भर करते हैं, इसलिए वे नियत बिंदु नहीं हो सकते। त्रिक बिंदु (जहाँ ठोस, द्रव और वाष्प तीनों साम्य में हों) एक अद्वितीय (दाब, ताप) युग्म है — इसीलिए आधुनिक तापमिति उसी पर आधारित है।
गर्म करने पर धातु की चादर में छिद्र का व्यास बढ़ता है — छिद्र पदार्थ की तरह ही फैलता है। ‘छिद्र सिकुड़ जाएगा’ सोचना सबसे आम भ्रांति है (प्रश्न 11.8)।
दो छड़ों को जोड़कर गर्म करने पर तापीय प्रतिबल तभी उत्पन्न होता है जब प्रसार रोका जाए (सिरे जकड़े हों)। सिरे स्वतंत्र हों तो छड़ें केवल लंबी होती हैं, कोई प्रतिबल नहीं होता (प्रश्न 11.10)।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- ताप और ऊष्मा में अंतर बताइए। संकेत: ताप गर्माहट का माप है; ऊष्मा तापांतर से बहने वाली ऊर्जा है।
- सेल्सियस को केल्विन में कैसे बदलें? संकेत: 273.15 जोड़कर।
- ऊष्मा स्थानांतरण की तीन विधियाँ कौनसी हैं? संकेत: चालन, संवहन, विकिरण।
- पानी का असंगत प्रसार क्या है? संकेत: 0–4°C में गर्म करने पर पानी सिकुड़ता है।
- गुप्त ऊष्मा किसे कहते हैं? संकेत: अवस्था बदलने के लिए दी गई ऊष्मा, बिना ताप बदले।
मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A
- सेल्सियस पैमाने में 273.15 क्यों, 273.16 क्यों नहीं? उत्तर: क्योंकि सेल्सियस शून्य को त्रिक बिंदु से 0.01 K नीचे परिभाषित किया गया है (त्रिक बिंदु = 0.01 °C)।
- गर्म करने पर छिद्र का व्यास बढ़ेगा या घटेगा? उत्तर: बढ़ेगा — छिद्र पदार्थ की तरह ही फैलता है।
- शीतकाल में पीतल का गिलास लकड़ी की ट्रे से अधिक ठंडा क्यों लगता है? उत्तर: दोनों का ताप समान है, पर पीतल ऊष्मा का अच्छा चालक है — वह हाथ से ऊष्मा तेज़ी से खींच लेता है।
- क्रांतिक ताप से ऊपर गैस को दाब से द्रवित क्यों नहीं किया जा सकता? उत्तर: क्योंकि क्रांतिक ताप से ऊपर अणुओं की गतिज ऊर्जा इतनी अधिक होती है कि अंतराणविक बल उन्हें बाँधकर द्रव नहीं बना पाते।
- भाप से तापन गर्म जल से तापन की तुलना में अधिक दक्ष क्यों है? उत्तर: भाप संघनित होकर गुप्त ऊष्मा भी देती है — प्रति इकाई द्रव्यमान अधिक ऊष्मा मिलती है।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- रेल पटरियों में अंतराल क्यों छोड़ा जाता है? उत्तर: गर्मी में प्रसार के लिए जगह चाहिए, वरना पटरी टेढ़ी हो जाएगी।
- झील की सतह जमने पर मछलियाँ कैसे जीवित रहती हैं? उत्तर: नीचे का पानी 4°C पर रहता है क्योंकि पानी का असंगत प्रसार होता है।
- सूर्य की गर्मी किस विधि से आती है? उत्तर: विकिरण से, क्योंकि अंतरिक्ष में माध्यम नहीं है।
- कैलोरीमिति का सिद्धांत क्या है? उत्तर: दी गई ऊष्मा = ली गई ऊष्मा।
- पानी की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होने का क्या लाभ है? उत्तर: वह धीरे गर्म होता है, इसलिए समुद्री जलवायु सम रहती है।
पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)
नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।
- 11.1 नियॉन तथा CO₂ के त्रिक बिंदु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं: सेल्सियस में: 24.57 − 273.15 = −248.58 °C और 216.55 − 273.15 = −56.60 °C; फ़ारेनहाइट में: 9/5×(−248.58) + 32 ≈ −415.4 °F और 9/5×(−56.60) + 32 ≈ −69.9 °F।
- 11.2 दो परम ताप पैमानों A तथा B पर जल के त्रिक बिंदु को 200 A तथा 350 B द्वारा परिभाषित किया गया है: दोनों पैमानों का शून्य परम शून्य पर है, अतः T_A/T_B = 200/350 = 4/7 — अर्थात् T_A = (4/7)·T_B।
- 11.3 तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ R = R₀[1 + α(T − T₀)] के अनुसार परिवर्तित होता है: जल के त्रिक बिंदु (273.16 K) पर प्रतिरोध 101.6 Ω और लेड के सामान्य संगलन बिंदु (600.5 K) पर 165.5 Ω है: α = (165.5 − 101.6)/(101.6×327.34) ≈ 1.92×10⁻³ K⁻¹; प्रतिरोध 123.4 Ω होने पर ताप = 273.16 + (123.4 − 101.6)/(101.6×1.92×10⁻³) ≈ 385 K।
- 11.4 (a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिंदु एक मानक नियत बिंदु है, क्योंकि यह एक अद्वितीय (दाब, ताप) युग्म है जहाँ तीनों प्रावस्थाएँ साम्य में रहती हैं; बर्फ के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत बिंदु मानने में दोष यह है कि वे दाब (और अशुद्धियों) पर निर्भर करते हैं। (b) केल्विन परम ताप पैमाने पर दूसरा ‘नियत बिंदु’ परम शून्य (0 K) है — पैमाने का शून्य ही दूसरा संदर्भ है। (c) संबंध में 273.15 लिखा है, 273.16 नहीं, क्योंकि सेल्सियस शून्य को त्रिक बिंदु से 0.01 K नीचे परिभाषित किया गया है (त्रिक बिंदु = 0.01 °C)। (d) उस परम ताप पैमाने पर जिसके एकांक अंतराल का आमाप फ़ारेनहाइट के एकांक अंतराल के आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिंदु का ताप = 273.16 × 9/5 = 491.7 इकाई होगा।
- 11.5 दो आदर्श गैस तापमापियों A (ऑक्सीजन) तथा B (हाइड्रोजन) में: (a) सल्फर के सामान्य गलनांक के परम ताप: A से T = 273.16 × 1.797/1.250 ≈ 392.7 K; B से T = 273.16 × 0.287/0.200 ≈ 392.0 K। (b) दोनों उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का कारण यह है कि गैसें पूर्णतः आदर्श नहीं हैं; दोनों पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए प्रयोग को कम दाबों पर करना चाहिए और शून्य दाब की ओर बहिर्वेशन (extrapolation) करना चाहिए — आदर्श गैस ताप ही वास्तविक परम ताप है।
- 11.6 1 m लंबे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0 °C पर किया गया है; किसी तप्त दिन (45 °C) इस फीते से स्टील की छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी गई: फीता भी फैल गया है, अतः छड़ की वास्तविक लंबाई = 63.0×(1 + 1.20×10⁻⁵×18) ≈ 63.014 cm। जिस दिन ताप 27.0 °C होगा, उस दिन छड़ सिकुड़कर 63.0 cm की हो जाएगी (फीता तब यथार्थ है और छड़ का तापीय संकुचन माप को वापस 63.0 cm पर ले आता है)।
- 11.7 बड़ी स्टील की पहिए को उसी पदार्थ की धुरी पर ठीक बैठाना है: 27 °C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm और पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है; सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया: आवश्यक संकुचन = 0.01/8.70 = α·ΔT से ΔT ≈ 95.8 K — अतः धुरी को लगभग −69 °C तक ठंडा करना होगा, तब पहिया धुरी पर चढ़ जाएगा (स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक 1.20×10⁻⁵ K⁻¹ नियत मानकर)।
- 11.8 ताँबे की चादर में छिद्र 27.0 °C पर 4.24 cm व्यास का है; चादर को 227 °C तक तप्त करने पर छिद्र का व्यास भी पदार्थ की तरह फैलेगा: परिवर्तन = 4.24 × 1.70×10⁻⁵ × 200 ≈ 0.0144 cm — अतः छिद्र का नया व्यास ≈ 4.254 cm होगा।
- 11.9 27 °C पर दो दृढ़ टेकों के बीच थोड़ा कसा गया ताँबे का तार −39 °C तक शीतल किया जाता है (ताप-अंतर 66 K): तार में उत्पन्न प्रतिबल = Y·α·ΔT = 0.91×10¹¹ × 2.0×10⁻⁵ × 66 ≈ 1.2×10⁸ Pa; तार का व्यास 2.0 mm होने पर तनाव = 1.2×10⁸ × π×(1.0×10⁻³)² ≈ 377 N।
- 11.10 50 cm लंबी पीतल की छड़ को उसी लंबाई और व्यास की स्टील की छड़ से जोड़ा गया है; मूल लंबाइयाँ 40 °C पर हैं; 250 °C पर (ΔT = 210 K): पीतल का प्रसार = 50×2.0×10⁻⁵×210 = 0.21 cm; स्टील का प्रसार = 50×1.2×10⁻⁵×210 = 0.126 cm; संयुक्त छड़ की लंबाई में कुल परिवर्तन = 0.336 cm (≈ 0.34 cm); संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होगा, क्योंकि छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है।
- 11.11 ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49×10⁻⁵ K⁻¹ है; ताप में 30 °C की वृद्धि होने पर उसके घनत्व में आंशिक परिवर्तन = −γ·ΔT = −49×10⁻⁵×30 = −0.0147 (लगभग −1.5%) — घनत्व घटेगा।
- 11.12 8.0 kg के ऐलुमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए 10 kW की बरमी का उपयोग किया गया है; 2.5 मिनट में (50% शक्ति बरमी को गर्म करने में या परिवेश में लुप्त हो जाती है): उपयोगी ऊर्जा = 0.5×10,000×150 = 7.5×10⁵ J; ब्लॉक के ताप में वृद्धि = 7.5×10⁵/(8.0×910) ≈ 103 K (103 °C)।
- 11.13 2.5 kg के ताँबे के गुटके को भट्टी में 500 °C तक तप्त करने के पश्चात् बड़े बर्फ-ब्लॉक पर रख दिया जाता है: 0 °C तक ठंडा होने में गुटका 2.5×390×500 = 4,87,500 J ऊष्मा देगा; गलित हो सकने वाली बर्फ की अधिकतम मात्रा = 4,87,500/3,35,000 ≈ 1.5 kg।
- 11.14 धातु के 0.20 kg के गुटके को 150 °C पर तप्त करके ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक 0.025 kg) में रखे 27 °C के 150 cm³ जल में गिराया जाता है; अंतिम ताप 40 °C है: ऊष्मा-संतुलन से 0.20×s×110 = (0.150 + 0.025)×4186×13 → s ≈ 433 J/kg·K। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानी जाए (अर्थात् उसका हिसाब लगाया जाए), तो धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता का मान इससे अधिक आएगा — उपेक्षा करने पर प्राप्त मान वास्तविक मान से कम होता है, क्योंकि धातु की कुछ ऊष्मा परिवेश में चली गई थी, जल में नहीं आई।
- 11.15 कक्ष ताप पर कुछ सामान्य गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ (C_V): हाइड्रोजन 4.87, नाइट्रोजन 4.97, ऑक्सीजन 5.02, नाइट्रिक ऑक्साइड 4.99, कार्बन मोनोक्साइड 5.01 cal/mol·K — ये द्विपरमाणुक गैसों की हैं और एकपरमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (लगभग 2.92 cal/mol·K) से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। स्पष्टीकरण: एकपरमाणुक गैस में केवल 3 स्थानांतरीय स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं (C_V = 3/2·R ≈ 2.96 cal/mol·K), जबकि द्विपरमाणुक गैस में 2 घूर्णन कोटियाँ और जुड़ जाती हैं (C_V = 5/2·R ≈ 4.96 cal/mol·K)। क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (6.17) से निष्कर्ष निकलता है कि Cl₂ में कंपन की कोटियाँ भी आंशिक रूप से उत्तेजित हो रही हैं (भारी अणु, निम्न कंपन आवृत्ति)।
- 11.16 CO₂ के P-T प्रावस्था आरेख पर आधारित: (a) CO₂ की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ त्रिक बिंदु (−56.6 °C, 5.11 atm) पर साम्य में सहवर्ती हो सकती हैं। (b) दाब में कमी का गलनांक पर प्रभाव नगण्य (गलन वक्र लगभग ऊर्ध्व) है, पर क्वथनांक पर प्रभाव बड़ा है — दाब घटने पर क्वथनांक घटता है (वाष्प-दाब वक्र)। (c) CO₂ के लिए क्रांतिक ताप 31.1 °C तथा क्रांतिक दाब 73 atm हैं; इनका महत्त्व यह है कि क्रांतिक ताप से ऊपर CO₂ को केवल दाब बढ़ाकर द्रवित नहीं किया जा सकता — वह गैस/पराक्रांतिक तरल ही रहती है। (d) (a) −70 °C, 1 atm पर CO₂ ठोस अवस्था में होगी (त्रिक ताप से नीचे, कम दाब — शुष्क बर्फ क्षेत्र); (b) −60 °C, 10 atm पर भी ठोस (त्रिक ताप से नीचे द्रव संभव नहीं); (c) 15 °C, 56 atm पर द्रव (इस ताप पर वाष्प-दाब लगभग 50 atm है; 56 atm उससे अधिक है)।
- 11.17 CO₂ के P-T आरेख पर आधारित: (a) 1 atm दाब तथा −60 °C ताप पर CO₂ का समतापी संपीडन किया जाता है — यह द्रव प्रावस्था में नहीं जाएगी; त्रिक ताप से नीचे होने के कारण वाष्प सीधे ठोस में बदलेगी (निक्षेपण)। (b) 4 atm दाब पर (त्रिक दाब 5.11 atm से कम) CO₂ को दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतल किया जाता है — वाष्प सीधे ठोस बन जाएगी, द्रव प्रावस्था नहीं आएगी। (c) 10 atm दाब तथा −65 °C ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO₂ को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय: पहले ठोस पिघलकर द्रव बनेगी (गलन वक्र पार होगा), फिर द्रव उबलकर वाष्प बन जाएगी (क्वथन वक्र पार होगा) — गुणात्मक परिवर्तन: ठोस → द्रव → गैस। (d) CO₂ को 70 °C तक तप्त तथा समतापी संपीडित किया जाता है — 70 °C क्रांतिक ताप (31.1 °C) से ऊपर है, इसलिए कोई तीक्ष्ण प्रावस्था परिवर्तन नहीं होगा; घनत्व निरंतर बढ़ेगा, कोई गुप्त ऊष्मा या पृष्ठ (meniscus) नहीं दिखेगा — गैस पराक्रांतिक तरल की ओर सतत रूप से जाएगी।
- 11.18 101 °F ताप ज्वर से पीड़ित बच्चे को एंटीपायरिन दी गई, जिससे उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई; 20 मिनट में ज्वर 98 °F तक गिर जाता है: ताप-पतन = 3 °F = 1.667 K; बच्चे का द्रव्यमान 30 kg और शरीर की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल के लगभग बराबर मानकर, निकली ऊष्मा = 30×4186×1.667 ≈ 2.09×10⁵ J; वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal/g (= 2.43×10⁶ J/kg) से वाष्पित पसीना = 2.09×10⁵/2.43×10⁶ ≈ 0.086 kg — अतः दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर ≈ 4.3 g/min।
पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)
ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।
- 11.19 थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स’ गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भंडारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है: 30 cm भुजा के बॉक्स की दीवारों की मोटाई 5.0 cm है; बॉक्स में 4.0 kg बर्फ रखी है; 6 h पश्चात् बची बर्फ की मात्रा का आकलन: बॉक्स का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6×0.09 = 0.54 m²; चालन से आई ऊष्मा = kAΔT·t/d = 0.01×0.54×45×21,600/0.05 ≈ 1.05×10⁵ J; पिघली बर्फ = 1.05×10⁵/3.35×10⁵ ≈ 0.31 kg — अतः 6 h पश्चात् बची बर्फ ≈ 3.7 kg (बाहरी ताप 45 °C मानकर)।
- 11.20 पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल 0.15 m² तथा मोटाई 1.0 cm है; गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/min की दर से जल उबलता है: आवश्यक ऊष्मा-दर = 0.10×2256×10³ = 2,25,600 W; चालन समीकरण से ΔT = (2,25,600×0.01)/(109×0.15) ≈ 138 K — अतः बॉयलर के संपर्क की ज्वाला के भाग का ताप ≈ 100 + 138 = 238 °C।
- 11.21 (a) अधिक परावर्तकता वाले पिंड अल्प उत्सर्जक होते हैं — किरचॉफ़ नियम से अच्छा अवशोषक ही अच्छा उत्सर्जक होता है; परावर्तक पिंड कम अवशोषित करता है, अतः कम उत्सर्जित भी करता है। (b) कंपकंपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है — दोनों का ताप समान है, पर पीतल ऊष्मा का अच्छा चालक है और हाथ से ऊष्मा तेज़ी से खींच लेता है, जबकि लकड़ी कुचालक है। (c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है) खुले में रखे लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परंतु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है — क्योंकि भट्टी के भीतर लोहा परिवेश के विकिरण से साम्य में होता है और कृष्णिका की तरह व्यवहार करता है; खुले में उसकी उत्सर्जकता 1 से कम होती है। (d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी — वातावरण की हरितगृह क्रिया (पृथ्वी से उत्सर्जित अवरक्त विकिरण का अवशोषण और पुनः उत्सर्जन) के बिना पृथ्वी की ऊष्मा सीधे अंतरिक्ष में चली जाएगी। (e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं — क्योंकि भाप संघनित होकर अपनी गुप्त ऊष्मा भी देती है, प्रति इकाई द्रव्यमान अधिक ऊष्मा मिलती है।
- 11.22 किसी पिंड का ताप 5 मिनट में 80 °C से 50 °C हो जाता है; परिवेश का ताप 20 °C है: न्यूटन के शीतलन नियम से (80−50)/5 = C×(65−20) → C = 6/45 = 0.1333 min⁻¹; 60 °C से 30 °C होने में लगा समय t: (60−30)/t = C×(45−20) = 0.1333×25 = 3.333 → t = 9 मिनट।
- तापमान पैमाने: केल्विन परम है; त्रिक बिंदु (273.16 K) ही एकमात्र नियत बिंदु है; t_C = T − 273.15।
- ऊष्मीय प्रसार: छिद्र भी पदार्थ की तरह फैलता है; जकड़ी छड़ में प्रतिबल = YαΔT; मुक्त सिरों पर कोई प्रतिबल नहीं।
- विशिष्ट ऊष्मा: द्विपरमाणुक गैसों में घूर्णन कोटियों के कारण C_V अधिक (≈5 बनाम ≈3 cal/mol·K)।
- CO₂ आरेख: त्रिक बिंदु −56.6 °C/5.11 atm; क्रांतिक बिंदु 31.1 °C/73 atm; त्रिक दाब से नीचे द्रव प्रावस्था नहीं आती।
- ऊष्मा स्थानांतरण: चालन/संवहन/विकिरण; किरचॉफ़ नियम; शीतलन की दर ∝ ताप-अंतर।

