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Class 11 • Physics • Bhautiki Bhag-1

Chapter 7: गुरुत्वाकर्षण

केप्लर के नियम, सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण, उपग्रह, पलायन चाल और ज्वार-भाटा — पुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों सहित।

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

Print: browser से PDF save कर सकते हैं। यह कोई textbook PDF नहीं है।

गुरुत्वाकर्षण — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics)  |  Chapter 7  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम

दो द्रव्यमानों के बीच आकर्षण बल F = G m₁m₂/r² होता है, जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है। यह बल हमेशा आकर्षी होता है और दोनों द्रव्यमानों पर बराबर-विपरीत लगता है।

पृथ्वी की सतह पर g = GM/R² होता है। ऊँचाई पर जाने या गहराई में जाने पर g का मान घटता है।

केप्लर के नियम

केप्लर का पहला नियम कहता है कि ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमते हैं। दूसरा नियम क्षेत्रफलीय वेग की स्थिरता बताता है — ग्रह सूर्य के निकट तेज़ और दूर धीमा चलता है।

तीसरा नियम कहता है कि परिक्रमण काल का वर्ग कक्षा की त्रिज्या के घन के समानुपाती होता है: T² ∝ r³।

उपग्रह और पलायन वेग

पृथ्वी के निकट उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 7.9 km/s होती है। भू-स्थिर उपग्रह पृथ्वी के साथ ही घूमता प्रतीत होता है और भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित होता है।

पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे वस्तु पृथ्वी के गुरुत्व से सदा के लिए निकल जाए — पृथ्वी के लिए लगभग 11.2 km/s। यह वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।

इस अध्याय का विचार: वही बल जो सेब को गिराता है, चंद्रमा को कक्षा में रखता है और ग्रहों को सूर्य के चारों ओर घुमाता है। केप्लर के नियम, न्यूटन का व्युत्क्रम-वर्ग नियम और ऊर्जा-संरक्षण मिलकर उपग्रहों, पलायन चाल और ज्वार-भाटा — सबकी व्याख्या कर देते हैं।

पुस्तक की संरचना: अध्याय केप्लर के नियमों से शुरू होकर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम, पृथ्वी के भीतर-बाहर g का परिवर्तन, गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा, पलायन चाल, भू-तुल्यकाली उपग्रह और भारहीनता तक जाता है।

8.1–8.3 केप्लर के नियम

पहला नियम: ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं, सूर्य एक नाभि पर होता है। दूसरा नियम: सूर्य-ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है — यह कोणीय संवेग संरक्षण का ही रूप है (ग्रह सूर्य के निकट तेज़, दूर धीमा)। तीसरा नियम: T² = K·R³ — कक्षीय आवर्तकाल का वर्ग अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के अनुक्रमानुपाती होता है।

8.4–8.5 सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम

F = G·m₁m₂/r² — बल दोनों द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। गोलीय सममित पिंड बाहर के किसी कण को ऐसे आकर्षित करता है जैसे उसका संपूर्ण द्रव्यमान केंद्र पर हो; एकसमान गोलीय खोल के भीतर किसी कण पर बल शून्य होता है।

8.6–8.7 पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण में परिवर्तन

पृथ्वी के पृष्ठ पर g = GM/R²। ऊँचाई पर g घटता है (g ∝ 1/(R+h)²); गहराई में (एकसमान घनत्व मानकर) g घटता है (g ∝ r, केंद्र पर शून्य)। महत्त्वपूर्ण: g पिंड के अपने द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता — भारी और हल्का पिंड समान त्वरण से गिरते हैं।

8.8–8.10 गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा

दो बिंदु द्रव्यमानों की स्थितिज ऊर्जा V = −Gm₁m₂/r (शून्य अनंत पर)। स्थितिज ऊर्जा का अंतर ही भौतिक है — शून्य का चुनाव यादृच्छिक है। बंधे निकाय (कक्षा, परमाणु) की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है; कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा = −गतिज ऊर्जा (E = K + V = −K)।

8.11–8.13 पलायन चाल और उपग्रह

पलायन चाल vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) — पृथ्वी के लिए 11.2 km/s; यह पिंड के द्रव्यमान, प्रक्षेपण की दिशा पर निर्भर नहीं करती, केवल प्रक्षेपण बिंदु की पृथ्वी-केंद्र से दूरी पर निर्भर करती है। भू-तुल्यकाली उपग्रह विषुवतीय तल में, पृथ्वी केंद्र से लगभग 42,200 km दूरी पर, 24 घंटे के आवर्तकाल से घूमते हैं।

8.14–8.15 भारहीनता

कक्षा में अंतरिक्ष यात्री भारहीनता अनुभव करता है — इसलिए नहीं कि वहाँ गुरुत्व बल कम है, बल्कि इसलिए कि यात्री और यान दोनों पृथ्वी की ओर स्वतंत्र रूप से गिर रहे हैं। बड़े अंतरिक्ष स्टेशन में गुरुत्व बल का संसूचन संभव है, क्योंकि स्टेशन के विभिन्न भागों पर गुरुत्व बल भिन्न होता है (ज्वारीय प्रभाव)।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

विषयमुख्य सूत्र/मान
गुरुत्व बलF = Gm₁m₂/r²
सतह पर gg = GM/R²
कक्षीय चाललगभग 7.9 km/s
पलायन वेगलगभग 11.2 km/s

गुरुत्वाकर्षण — ग्रह और उपग्रह

चित्र 1: चित्र 1 में सूर्य, ग्रह की कक्षा, उपग्रह और पलायन वेग का चक्र दिखाया गया है।

गुरुत्वाकर्षण — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

पृथ्वी की परिक्रमा करता उपग्रह

नया चित्र (लेबल चित्र पर ही छपे हैं): पृथ्वी की परिक्रमा करता उपग्रह

मुख्य शब्द / Key Terms

  • गुरुत्वाकर्षण: द्रव्यमानों के बीच आकर्षण।
  • गुरुत्वीय त्वरण g: पृथ्वी द्वारा उत्पन्न त्वरण।
  • केप्लर नियम: ग्रह गति के तीन नियम।
  • कक्षीय चाल: उपग्रह की वृत्तीय कक्षा की चाल।
  • पलायन वेग: गुरुत्व से निकलने का न्यूनतम वेग।
  • केप्लर के नियम: दीर्घवृत्तीय कक्षा; समान क्षेत्रफल नियम (कोणीय संवेग संरक्षण); T² ∝ R³।
  • सार्वत्रिक नियम: F = Gm₁m₂/r²; G = 6.67×10⁻¹¹ N·m²/kg²।
  • गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: V = −GMm/r (शून्य अनंत पर); बंधे निकाय की कुल ऊर्जा ऋणात्मक।
  • पलायन चाल: vₑ = √(2gR) ≈ 11.2 km/s (पृथ्वी); चंद्रमा के लिए 2.3 km/s।
  • कक्षा में ऊर्जा: E = −GMm/2r; कक्षा से पलायन में GMm/2r ऊर्जा चाहिए (स्थिर पिंड के लिए GMm/r से कम)।

याद रखें

  • G का मान 6.67×10⁻¹¹ Nm²/kg² है।
  • g ऊँचाई और गहराई दोनों में घटता है।
  • केप्लर का तीसरा नियम T² ∝ r³ है।
  • पलायन वेग द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
  • भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल 24 घंटे होता है।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: g को हर जगह 9.8 मान लेना। चंद्रमा पर g पृथ्वी का लगभग छठा भाग है और ऊँचाई पर भी g घटता है।

जानकारी — ज्वार चंद्रमा से क्यों?

सूर्य का पृथ्वी पर गुरुत्वीय खिंचाव चंद्रमा के खिंचाव से लगभग 180 गुना अधिक है, फिर भी ज्वार-भाटा मुख्यतः चंद्रमा से आते हैं — क्योंकि ज्वारीय प्रभाव बल पर नहीं, बल के अंतर (∝ M/r³) पर निर्भर करता है, और इसमें चंद्रमा सूर्य से लगभग 2.2 गुना प्रभावी है।

चेतावनी — गुरुत्वीय परिरक्षण असंभव है

वैद्युत बलों से परिरक्षण खोखले चालक से संभव है, पर गुरुत्वीय बलों से परिरक्षण किसी भी साधन से संभव नहीं है — गुरुत्व हर पदार्थ को भेदकर लगता है।

टिप — कक्षा-ऊर्जा का आधा नियम

वृत्तीय कक्षा में: गतिज ऊर्जा = GMm/2r, स्थितिज ऊर्जा = −GMm/r, कुल ऊर्जा = −GMm/2r। कक्षा से पलायन के लिए कुल ऊर्जा को शून्य तक लाना है, अतः GMm/2r ऊर्जा चाहिए — स्थिर पिंड को उसी ऊँचाई से पलायन कराने में GMm/r लगती है।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र लिखिए। संकेत: F = Gm₁m₂/r²।
  2. केप्लर के तीन नियम क्या हैं? संकेत: दीर्घवृत्त कक्षा, समान क्षेत्रफल, T² ∝ r³।
  3. पलायन वेग कितना है? संकेत: पृथ्वी के लिए लगभग 11.2 km/s।
  4. g ऊँचाई पर क्यों घटता है? संकेत: क्योंकि केंद्र से दूरी बढ़ जाती है।
  5. भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल कितना है? संकेत: 24 घंटे।

मुख्य प्रश्नोत्तर — Core Q&A

  1. सूर्य का खिंचाव चंद्रमा से अधिक होने पर भी ज्वार चंद्रमा से क्यों आते हैं? उत्तर: ज्वार बल के अंतर (M/r³) पर निर्भर करता है, न कि बल पर — इसमें चंद्रमा लगभग 2.2 गुना प्रभावी है।
  2. कक्षा में यात्री भारहीन क्यों महसूस करता है? उत्तर: क्योंकि यात्री और यान दोनों पृथ्वी की ओर स्वतंत्र रूप से गिर रहे हैं — गुरुत्व बल कम होने से नहीं।
  3. पलायन चाल किन बातों पर निर्भर नहीं करती? उत्तर: पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण की दिशा पर नहीं; केवल प्रक्षेपण बिंदु की पृथ्वी-केंद्र से दूरी पर निर्भर करती है।
  4. अर्धगोलीय खोल के समतल पृष्ठ के किसी भी बिंदु पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा क्या है? उत्तर: समतल के लंबवत्, खोल की ओर (नीचे की ओर) — क्षैतिज घटक ठीक-ठीक निरस्त हो जाते हैं।
  5. कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा का चिह्न क्या है? उत्तर: ऋणात्मक — बंधे निकाय की पहचान; E = −गतिज ऊर्जा।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. चंद्रमा पर g पृथ्वी का लगभग कितना भाग है? उत्तर: लगभग छठा भाग।
  2. दो द्रव्यमानों की दूरी दोगुनी हो तो बल कितना होगा? उत्तर: एक-चौथाई, क्योंकि बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है।
  3. केप्लर के दूसरे नियम का अर्थ क्या है? उत्तर: ग्रह सूर्य के निकट तेज़ और दूर धीमा चलता है।
  4. पलायन वेग द्रव्यमान पर क्यों निर्भर नहीं करता? उत्तर: क्योंकि गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा दोनों द्रव्यमान के समानुपाती हैं।
  5. उपग्रह की कक्षीय चाल त्रिज्या पर कैसे निर्भर करती है? उत्तर: त्रिज्या बढ़ने पर कक्षीय चाल घटती है।

पुस्तक के अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (मुख्य अभ्यास)

नीचे के प्रश्न पुस्तक के अभ्यास (मुख्य भाग) के प्रश्नों पर आधारित हैं, EG के अपने शब्दों में लिखे गए हैं; उत्तर स्वयं जाँचकर दिए गए हैं।

  1. 8.1 (a) नहीं — किसी पिंड का गुरुत्वीय प्रभाव से परिरक्षण खोखले गोले में रखकर या किसी अन्य साधन से संभव नहीं है; गुरुत्वीय परिरक्षण संभव ही नहीं है (वैद्युत परिरक्षण के विपरीत)। (b) छोटे अंतरिक्ष यान में बैठा यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता (मुक्त रूप से गिरता तंत्र); बड़े अंतरिक्ष स्टेशन में हाँ — स्टेशन के विभिन्न भागों पर गुरुत्व बल भिन्न होता है, इसलिए ज्वारीय प्रभाव से संसूचन संभव है। (c) सूर्य का पृथ्वी पर गुरुत्वीय खिंचाव चंद्रमा के खिंचाव से अधिक है, फिर भी चंद्रमा का ज्वारीय प्रभाव सूर्य से अधिक है, क्योंकि ज्वारीय प्रभाव M/r³ पर निर्भर करता है, M/r² पर नहीं।
  2. 8.2 सही विकल्प: (a) बढ़ती ऊँचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण घटता है (g ∝ 1/(R+h)²)। (b) बढ़ती गहराई के साथ (एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण घटता है (भीतर g ∝ r)। (c) गुरुत्वीय त्वरण पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता (पृथ्वी के द्रव्यमान पर करता है)। (d) स्थितिज ऊर्जा-अंतर के लिए सूत्र −GMm(1/r₂ − 1/r₁), सूत्र mg(r₂ − r₁) से अधिक यथार्थ है (दूसरा सूत्र g को नियत मानता है)।
  3. 8.3 कोई ग्रह सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है: v ∝ 1/√R से R_ग्रह = R_पृथ्वी/4 — अतः पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप एक-चौथाई है।
  4. 8.4 बृहस्पति के उपग्रह आयो की कक्षीय अवधि 1.769 दिन और कक्षा त्रिज्या 4.22×10⁸ m है: M = 4π²R³/(GT²) से बृहस्पति का द्रव्यमान ≈ 1.9×10²⁷ kg प्राप्त होता है, जो सूर्य के द्रव्यमान (2×10³⁰ kg) का लगभग 1/1000 गुना है।
  5. 8.5 आकाशगंगा में एक सौर द्रव्यमान के 2.5×10¹¹ तारे हैं; मंदाकिनीय केंद्र से 50,000 ly दूर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में: आकाशगंगा का व्यास 10⁵ ly है, अतः तारा भीतरी भाग में है — परिबद्ध द्रव्यमान ≈ (1/2)³ × कुल = 3.125×10¹⁰ सौर द्रव्यमान; T = 2π√(r³/GM) से आवर्तकाल ≈ 10⁹ वर्ष (लगभग एक अरब वर्ष)।
  6. 8.6 सही विकल्प: (a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनंत पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते उपग्रह की कुल ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा का ऋणात्मक है (E = K + V = −K)। (b) कक्षा में परिक्रमा करते उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा, समान ऊँचाई के किसी स्थिर पिंड को बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से कम होती है (GMm/2r बनाम GMm/r)।
  7. 8.7 किसी पिंड की पृथ्वी से पलायन चाल: (a) पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती; (b) प्रक्षेपण बिंदु की अवस्थिति (पृथ्वी-केंद्र से दूरी) पर निर्भर करती है; (c) प्रक्षेपण की दिशा पर निर्भर नहीं करती; (d) पिंड के प्रक्षेपण की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है (यह (b) का ही रूप है)।
  8. 8.8 धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है: (a) रैखिक चाल — नियत नहीं; (b) कोणीय चाल — नियत नहीं; (c) कोणीय संवेग — नियत; (d) गतिज ऊर्जा — नियत नहीं; (e) स्थितिज ऊर्जा — नियत नहीं; (f) कुल ऊर्जा — नियत। (सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में ह्रास नगण्य माना गया है।)
  9. 8.9 अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री के लिए दुःखदायी हो सकते हैं: (a) पैरों में सूजन — नहीं (भारहीनता में रक्त पैरों से ऊपर की ओर चला जाता है, पैरों की सूजन घटती है); (b) चेहरे पर सूजन — हाँ; (c) सिरदर्द — हाँ; (d) दिक्-विन्यास समस्या — हाँ।
  10. 8.10 एकसमान द्रव्यमान घनत्व की अर्धगोलीय खोलों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केंद्र पर गुरुत्वीय तीव्रता (चित्र 8.10): सममिति से क्षैतिज घटक निरस्त हो जाते हैं और नेट तीव्रता अक्ष के अनुदिश खोल की ओर (नीचे की ओर) होती है — अतः सही तीर (iii) c है।
  11. 8.11 उपरोक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिंदु P पर गुरुत्वीय तीव्रता: समतल पृष्ठ के किसी भी बिंदु पर क्षैतिज घटक ठीक-ठीक निरस्त हो जाते हैं (इसकी पुष्टि खोल पर संख्यात्मक समाकलन से भी होती है: क्षैतिज घटक शून्य), अतः तीव्रता समतल के लंबवत् नीचे की ओर होती है — सही तीर (ii) e है।
  12. 8.12 पृथ्वी से सूर्य की ओर रॉकेट दागा गया है; रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य होने का बिंदु (उदासीन बिंदु): GM_E/x² = GM_S/(D−x)² से x = D/(1 + √(M_S/M_E)) = 1.5×10¹¹/(1 + 577) ≈ 2.6×10⁸ m (पृथ्वी के केंद्र से) — अर्थात् पृथ्वी से लगभग 2,60,000 km दूर।
  13. 8.13 सूर्य को ‘तोलना’: पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 1.5×10⁸ km और आवर्तकाल 1 वर्ष लेकर, M_S = 4π²R³/(GT²) से सूर्य का द्रव्यमान ≈ 2×10³⁰ kg प्राप्त होता है — यही विधि किसी भी ग्रह के आवर्तकाल और कक्षा-त्रिज्या से केंद्रीय पिंड का द्रव्यमान निकालने की है।
  14. 8.14 एक शनि वर्ष एक पृथ्वी-वर्ष का 29.5 गुना है: केप्लर के तृतीय नियम से R_शनि = R_पृथ्वी × (29.5)^(2/3) ≈ 1.5×10⁸ × 9.54 ≈ 1.43×10⁹ km (सूर्य से दूरी)।
  15. 8.15 पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का भार 63 N है; पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर g′ = g/(1.5)² = g/2.25, अतः भार = 63/2.25 = 28 N।
  16. 8.16 पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर, पृष्ठ पर 250 N भार वाली वस्तु का पृथ्वी के केंद्र की ओर आधी दूरी पर भार: भीतर g′ = g/2, अतः भार = 125 N।
  17. 8.17 पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वतः ऊपर की ओर रॉकेट 5 km/s की चाल से दागा जाता है (M_E = 6.0×10²⁴ kg, R_E = 6.4×10⁶ m): ऊर्जा संरक्षण से 1/r = 1/R − v²/(2GM) → r ≈ 8.0×10⁶ m — अतः रॉकेट पृथ्वी के केंद्र से 8.0×10⁶ m (पृष्ठ से लगभग 1600 km ऊपर) तक जाएगा और फिर वापस लौटेगा (पलायन नहीं करेगा, क्योंकि चाल 11.2 km/s से कम है)।
  18. 8.18 पृथ्वी के पृष्ठ पर प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 km/s है; वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल (33.6 km/s) से प्रक्षेपित किया जाता है: अनंत पर चाल v_∞ = √(v² − vₑ²) = 11.2×√8 ≈ 31.7 km/s।
  19. 8.19 उपग्रह (200 kg) पृथ्वी के पृष्ठ से 400 km ऊँचाई पर परिक्रमा कर रहा है: इसे पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में खर्च ऊर्जा = 0 − (−GMm/2r) = GMm/2r, r = 6.8×10⁶ m लेकर ≈ 5.9×10⁹ J।
  20. 8.20 दो तारे (प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान 2×10³⁰ kg के बराबर) सम्मुख संघट्ट के लिए आ रहे हैं; 10⁹ km दूरी पर उनकी चाल उपेक्षणीय है; प्रत्येक तारे की त्रिज्या 10⁴ km है: ऊर्जा संरक्षण से संघट्ट के समय कुल गतिज ऊर्जा = GM²(1/(2×10⁷) − 1/10¹²) ≈ 1.33×10⁴³ J; प्रत्येक तारे की चाल = √(2×6.67×10⁴²/2×10³⁰) ≈ 2.6×10⁶ m/s।
  21. 8.21 दो भारी गोले (प्रत्येक 100 kg, त्रिज्या 0.10 m) क्षैतिज मेज़ पर एक-दूसरे से 1.0 m दूर स्थित हैं: उनके केंद्रों को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिंदु पर गुरुत्वीय बल = 0 (दोनों खिंचाव बराबर और विपरीत) और विभव = 2×(−GM/0.5) ≈ −2.67×10⁻⁸ J/kg। इस बिंदु पर रखा कोई पिंड संतुलन में होगा, पर यह संतुलन अस्थायी होगा — थोड़ा विस्थापित करने पर वह किसी एक गोले की ओर गिर पड़ेगा।

पुस्तक के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न — Extension Q&A (अतिरिक्त भाग)

ये प्रश्न पुस्तक के ‘अतिरिक्त अभ्यास’ भाग से हैं, EG के अपने शब्दों में।

  1. 8.22 तुल्यकाली उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से लगभग 36,000 km ऊँचाई पर परिक्रमा करता है; उसके निर्धारित स्थल पर पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण विभव (अनंत पर स्थितिज ऊर्जा शून्य लेकर): r = 42,400 km = 4.24×10⁷ m; V = −GM/r = −6.67×10⁻¹¹×6.0×10²⁴/4.24×10⁷ ≈ −9.4×10⁶ J/kg।
  2. 8.23 सूर्य के द्रव्यमान से 2.5 गुना द्रव्यमान का तारा 12 km आमाप से निपात होकर 1.2 परिक्रमण प्रति सेकंड से घूर्णन कर रहा है (न्यूट्रॉन तारा): इसके विषुवत् वृत्त पर रखा कोई पिंड गुरुत्व बल के कारण पृष्ठ से चिपका रहेगा — पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण GM/R² ≈ 2.3×10¹² m/s² है, जबकि चिपके रहने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र त्वरण ω²R ≈ 6.8×10⁵ m/s² ही है; गुरुत्व इससे लगभग 30 लाख गुना अधिक है।
  3. 8.24 अंतरिक्षयान मंगल पर ठहरा हुआ है; इसे सौरमंडल से बाहर धकेलने में खर्च ऊर्जा = m×(GM_मंगल/R_मंगल + GM_सूर्य/r_मंगल-कक्षा) = 1000×(1.26×10⁷ + 5.85×10⁸) ≈ 6×10¹¹ J। (मंगल का अपना गुरुत्वीय भाग सूर्य के भाग की तुलना में छोटा है, पर उसे भी पार करना आवश्यक है।)
  4. 8.25 रॉकेट को मंगल के पृष्ठ से 2 km/s की चाल से ऊर्ध्व ऊपर दागा जाता है; मंगल के वातावरणीय प्रतिरोध के कारण उसकी 20% आरंभिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है: उपयोगी ऊर्जा प्रति kg = 0.8×½×(2000)² = 1.6×10⁶ J/kg; मंगल से पलायन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रति kg = GM/R ≈ 1.26×10⁷ J/kg; अतः GM/r = 1.26×10⁷ − 1.6×10⁶ = 1.10×10⁷ → r ≈ 3.89×10⁶ m — रॉकेट मंगल के पृष्ठ से लगभग 495 km ऊपर तक जाएगा और फिर वापस लौटेगा।
Recap — याद रखने वाली बातें
  • केप्लर के नियम: दीर्घवृत्तीय कक्षा; क्षेत्रफल नियम (कोणीय संवेग संरक्षण); T² ∝ R³।
  • सार्वत्रिक नियम F = Gm₁m₂/r²; गोलीय खोल के भीतर बल शून्य; गोलीय पिंड बाहर से केंद्र-बिंदु द्रव्यमान जैसा व्यवहार करता है।
  • गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा V = −GMm/r; बंधे निकाय की कुल ऊर्जा ऋणात्मक; कक्षा में E = −K।
  • पलायन चाल √(2gR) ≈ 11.2 km/s; यह द्रव्यमान और दिशा पर निर्भर नहीं करती।
  • भारहीनता मुक्त रूप से गिरने का परिणाम है, गुरुत्व की अनुपस्थिति का नहीं; ज्वार M/r³ पर निर्भर करते हैं।
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