कणों के निकाय तथा घूर्णी गति — BSEB Class 11 Physics, Chapter 6
BSEB Class 11 Physics (Book: Bhautiki Bhag-1) — EG के अपने शब्दों में मूल सार, हिंदी में
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
कणों के निकाय तथा घूर्णी गति — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Bhautiki Bhag-1 (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Physics) | Chapter 6 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
द्रव्यमान केंद्र
किसी निकाय का द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु है जहाँ निकाय का पूरा द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। बाहरी बल निकाय के द्रव्यमान केंद्र की गति को ही बदलता है, भले ही निकाय के हिस्से अलग-अलग घूमें।
दो कणों के निकाय में द्रव्यमान केंद्र भारी कण के निकट होता है। सममित वस्तुओं में द्रव्यमान केंद्र ज्यामितीय केंद्र पर होता है।
घूर्णन की राशियाँ
रैखिक गति के समान घूर्णन में कोणीय विस्थापन, कोणीय वेग ω और कोणीय त्वरण α होते हैं। रैखिक वेग v = ωr से कोणीय वेग से जुड़ता है।
बल आघूर्ण (torque) τ = rF sin θ होता है और यह घूर्णन में बल की भूमिका निभाता है। जड़त्व आघूर्ण I घूर्णन में द्रव्यमान की भूमिका निभाता है।
कोणीय संवेग और संतुलन
कोणीय संवेग L = Iω होता है। बाहरी बल आघूर्ण न लगे तो कोणीय संवेग संरक्षित रहता है — इसीलिए बर्फ पर घूमता खिलाड़ी हाथ सिकोड़कर तेज़ घूमता है।
संतुलन के लिए कुल बल और कुल बल आघूर्ण दोनों शून्य होने चाहिए। लुढ़कती वस्तु में स्थानांतरीय और घूर्णी दोनों गतिज ऊर्जाएँ होती हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| रैखिक राशि | घूर्णी समतुल्य |
|---|---|
| द्रव्यमान m | जड़त्व आघूर्ण I |
| बल F | बल आघूर्ण τ |
| संवेग mv | कोणीय संवेग Iω |
| गतिज ऊर्जा ½mv² | घूर्णी ऊर्जा ½Iω² |

चित्र 1: चित्र 1 में घूर्णन से जुड़ी पाँच राशियाँ केंद्र के चारों ओर दिखाई गई हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।
मुख्य शब्द / Key Terms
- द्रव्यमान केंद्र: निकाय का भार-केंद्र बिंदु।
- बल आघूर्ण: घूर्णन पैदा करने वाला प्रभाव।
- जड़त्व आघूर्ण: घूर्णन के प्रति जड़त्व।
- कोणीय संवेग: Iω, घूर्णन का संवेग।
- संतुलन: कुल बल और कुल आघूर्ण शून्य।
याद रखें
- रैखिक और घूर्णी सूत्रों की तुलना करके याद करें।
- जड़त्व आघूर्ण द्रव्यमान के वितरण पर निर्भर करता है।
- कोणीय संवेग संरक्षण में बाहरी आघूर्ण शून्य होना चाहिए।
- लुढ़कन में दोनों प्रकार की गतिज ऊर्जा जुड़ती है।
- द्रव्यमान केंद्र की गति बाहरी बल से ही बदलती है।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: जड़त्व आघूर्ण को केवल द्रव्यमान समझ लेना। समान द्रव्यमान की छड़ और गोले का जड़त्व आघूर्ण अलग होता है क्योंकि द्रव्यमान का वितरण अलग है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- द्रव्यमान केंद्र क्या है? संकेत: वह बिंदु जहाँ पूरा द्रव्यमान केंद्रित माना जा सके।
- बल आघूर्ण का सूत्र लिखिए। संकेत: τ = rF sin θ।
- कोणीय संवेग का सूत्र क्या है? संकेत: L = Iω।
- v और ω में क्या संबंध है? संकेत: v = ωr।
- संतुलन की शर्तें क्या हैं? संकेत: कुल बल और कुल आघूर्ण शून्य।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- बर्फ का खिलाड़ी हाथ सिकोड़कर तेज़ क्यों घूमता है? उत्तर: जड़त्व आघूर्ण घटता है, कोणीय संवेग स्थिर रहता है, इसलिए ω बढ़ता है।
- छड़ का जड़त्व आघूर्ण अक्ष की स्थिति पर क्यों निर्भर करता है? उत्तर: क्योंकि द्रव्यमान की अक्ष से दूरी बदल जाती है।
- लुढ़कते पहिए की कुल गतिज ऊर्जा क्या होगी? उत्तर: ½mv² + ½Iω²।
- दो कणों में द्रव्यमान केंद्र किसके निकट होगा? उत्तर: भारी कण के निकट।
- बल आघूर्ण शून्य हो तो कोणीय संवेग कैसा रहेगा? उत्तर: स्थिर रहेगा।

