प्राणि जगत — BSEB Class 11 Biology, Chapter 4
BSEB Class 11 Biology (Book: Jeev Vigyan) — EG के अपने शब्दों में मूल सार, हिंदी में
Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)
प्राणि जगत — EG के अपने शब्दों में सार
Book: Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Biology) | Chapter 4 | Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)
प्राणियों के संगठन के स्तर
प्राणियों में संगठन कोशिकीय, ऊतकीय, अंगीय और अंग-तंत्रीय स्तरों पर होता है। स्पंज में कोशिकीय स्तर और सीलेंटरेट में ऊतकीय स्तर पाया जाता है।
द्विपार्श्व सममिति में शरीर को दो बराबर भागों में बाँटा जा सकता है; अरीय सममिति में कई तलों से बाँटा जा सकता है।
अकशेरुकी संघ
पोरीफेरा (स्पंज) में नाल तंत्र होता है। सीलेंटरेटा में दंश कोशिकाएँ होती हैं। प्लैटीहेल्मिंथीज़ चपटे कृमि हैं, एस्केल्मिंथीज़ गोल कृमि हैं।
ऐनेलिडा में खंडित शरीर होता है, आर्थ्रोपोडा में संधित उपांग और काइटिन का बाह्यकंकाल होता है, मोलस्का में कवच होता है और इकाइनोडर्मेटा में जल संवहन तंत्र होता है।
कशेरुकी वर्ग
मत्स्य में शल्क और क्लोम होते हैं, उभयचर पानी और स्थल दोनों पर रहते हैं, सरीसृप में शुष्क शल्क वाली त्वचा होती है।
पक्षियों में पंख और खोखली हड्डियाँ होती हैं, स्तनधारियों में स्तन ग्रंथियाँ और बाल होते हैं।
तालिका / चार्ट — एक नज़र में
| समूह | पहचान |
|---|---|
| पोरीफेरा | नाल तंत्र |
| सीलेंटरेटा | दंश कोशिकाएँ |
| आर्थ्रोपोडा | संधित उपांग |
| मोलस्का | कवच |
| स्तनधारी | स्तन ग्रंथियाँ |

चित्र 1: चित्र 1 में प्राणि जगत के संघ सरल से जटिल क्रम में दिखाए गए हैं।

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।
मुख्य शब्द / Key Terms
- द्विपार्श्व सममिति: दो बराबर भागों में बँटने वाला शरीर।
- नाल तंत्र: स्पंज में जल प्रवाह का तंत्र।
- दंश कोशिका: शिकार पकड़ने वाली कोशिका।
- बाह्यकंकाल: शरीर के बाहर का कंकाल।
- क्लोम: जल में श्वसन का अंग।
याद रखें
- संघों का क्रम सरल से जटिल की ओर याद करें।
- हर संघ की एक पहचान याद रखें।
- कशेरुकी वर्गों की विशेषताएँ अलग-अलग जानें।
- सममिति के प्रकार समझें।
- उभयचर और सरीसृप का अंतर जानें।
परीक्षा टिप / आम गलती
आम गलती: उभयचर और सरीसृप को एक समझ लेना। उभयचर की त्वचा नम होती है और वे पानी पर निर्भर होते हैं; सरीसृप की त्वचा शुष्क और शल्क वाली होती है।
अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें
- स्पंज किस संघ का है? संकेत: पोरीफेरा का।
- दंश कोशिकाएँ किसमें होती हैं? संकेत: सीलेंटरेटा में।
- आर्थ्रोपोडा की पहचान क्या है? संकेत: संधित उपांग और काइटिन का बाह्यकंकाल।
- स्तनधारियों की दो विशेषताएँ बताइए। संकेत: स्तन ग्रंथियाँ और बाल।
- पक्षियों की हड्डियाँ कैसी होती हैं? संकेत: खोखली।
उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास
ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।
- सीलेंटरेटा को यह नाम क्यों मिला? उत्तर: क्योंकि उनमें सीलेंटरॉन (आंत्र गुहा) होती है।
- ऐनेलिडा और आर्थ्रोपोडा में क्या अंतर है? उत्तर: ऐनेलिडा में खंडित शरीर है, आर्थ्रोपोडा में संधित उपांग हैं।
- मोलस्का का एक उदाहरण दीजिए। उत्तर: घोंघा।
- मत्स्य और उभयचर में क्या अंतर है? उत्तर: मत्स्य केवल पानी में रहते हैं, उभयचर पानी और स्थल दोनों पर।
- इकाइनोडर्मेटा की पहचान क्या है? उत्तर: जल संवहन तंत्र।

