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जीव जगत का वर्गीकरण — BSEB Class 11 Biology, Chapter 2

BSEB Class 11 Biology (Book: Jeev Vigyan) — EG के अपने शब्दों में मूल सार, हिंदी में

Original notes — ready Educational Galaxy के अपने शब्दों में Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali)

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जीव जगत का वर्गीकरण — EG के अपने शब्दों में सार

Book: Jeev Vigyan (Purani pustak — 2025 se pehle wali) (BSEB, Class 11 Biology)  |  Chapter 2  |  Medium: हिंदी (English technical शब्द साथ में)

पाँच जगत प्रणाली

व्हिटेकर की पाँच जगत प्रणाली में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और ऐनिमेलिया आते हैं। यह प्रणाली कोशिका की बनावट, पोषण के तरीके और शरीर के संगठन पर आधारित है।

मोनेरा में बैक्टीरिया जैसे प्रोकैरियोट आते हैं और प्रोटिस्टा में एककोशिकीय यूकैरियोट आते हैं।

मोनेरा और प्रोटिस्टा

बैक्टीरिया चार आकारों में मिलते हैं — गोल (कोकस), छड़ (बैसिलस), सर्पिल (स्पाइरिलम) और अल्पविराम (विब्रियो)। कुछ बैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जैसे सायनोबैक्टीरिया।

प्रोटिस्टा में अमीबा, पैरामीशियम, डायटम और डाइनोफ्लैजलेट आते हैं। डायटम की सिलिका वाली दीवार समुद्र तल पर डायटमी मृदा बनाती है।

फंजाई, प्लांटी और ऐनिमेलिया

फंजाई में काइटिन की कोशिका भित्ति होती है और ये मृतोपजीवी या परजीवी पोषण करते हैं। यीस्ट एककोशिकीय कवक है।

प्लांटी में प्रकाश संश्लेषी पौधे और ऐनिमेलिया में बहुकोशिकीय जंतु आते हैं। विषाणु किसी जगत में नहीं आते क्योंकि वे जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी माने जाते हैं।

तालिका / चार्ट — एक नज़र में

जगतमुख्य लक्षण
मोनेराप्रोकैरियोट, एककोशिकीय
प्रोटिस्टायूकैरियोट, एककोशिकीय
फंजाईकाइटिन भित्ति, मृतोपजीवी
प्लांटीप्रकाश संश्लेषी
ऐनिमेलियाबहुकोशिकीय जंतु

जीव जगत का वर्गीकरण — पाँच जगत

चित्र 1: चित्र 1 में पाँच जगत क्रम से दिखाए गए हैं।

जीव जगत का वर्गीकरण — याद रखने योग्य बातें

चित्र 2: चित्र 2 में इस अध्याय की चार सबसे ज़रूरी बातें संक्षेप में दी गई हैं।

मुख्य शब्द / Key Terms

  • प्रोकैरियोट: बिना सुस्पष्ट केंद्रक वाली कोशिका।
  • यूकैरियोट: सुस्पष्ट केंद्रक वाली कोशिका।
  • मृतोपजीवी: मृत पदार्थ से पोषण लेने वाला।
  • डायटम: सिलिका भित्ति वाला शैवाल।
  • विषाणु: जीवित-निर्जीव के बीच की कड़ी।

याद रखें

  • पाँच जगतों के नाम क्रम से याद करें।
  • मोनेरा ही एकमात्र प्रोकैरियोट जगत है।
  • फंजाई की भित्ति काइटिन की होती है।
  • विषाणु किसी जगत में नहीं आता।
  • डायटम से डायटमी मृदा बनती है।

परीक्षा टिप / आम गलती

आम गलती: विषाणु को मोनेरा में रख देना। विषाणु किसी भी जगत में नहीं आता क्योंकि उसमें कोशिकीय संगठन नहीं होता।

अभ्यास प्रश्न — खुद करके देखें

  1. पाँच जगतों के नाम लिखिए। संकेत: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, ऐनिमेलिया।
  2. प्रोकैरियोट जगत कौनसा है? संकेत: मोनेरा।
  3. फंजाई की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है? संकेत: काइटिन की।
  4. डायटम की क्या विशेषता है? संकेत: सिलिका वाली भित्ति।
  5. विषाणु किसी जगत में क्यों नहीं आता? संकेत: क्योंकि उसमें कोशिकीय संगठन नहीं होता।

उत्तर सहित प्रश्न — बोर्ड-पैटर्न अभ्यास

ये Educational Galaxy के अपने बोर्ड-पैटर्न अभ्यास प्रश्न हैं, बोर्ड प्रश्नों की शैली में लिखे गए हैं। ये असली पिछले वर्षों के प्रश्न होने का दावा नहीं करते।

  1. बैक्टीरिया के चार आकार कौनसे हैं? उत्तर: कोकस, बैसिलस, स्पाइरिलम, विब्रियो।
  2. सायनोबैक्टीरिया की क्या विशेषता है? उत्तर: वे प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
  3. यीस्ट किस जगत का है? उत्तर: फंजाई का।
  4. पाँच जगत प्रणाली किसने दी? उत्तर: व्हिटेकर ने।
  5. प्रोटिस्टा और मोनेरा में क्या अंतर है? उत्तर: प्रोटिस्टा यूकैरियोट है, मोनेरा प्रोकैरियोट है।